राजनीति से ऊपर उठी इंसानियत की मिसाल : कहलगांव में एक ही फ्रेम में दिखी लोकतंत्र की सुंदर तस्वीर

भागलपुर: राजनीति अक्सर मतभेदों और प्रतिस्पर्धा की पहचान बन जाती है, लेकिन बुधवार को भागलपुर के कहलगांव में जो दृश्य सामने आया, उसने साबित कर दिया कि लोकतंत्र की असली आत्मा प्रतिद्वंद्विता में नहीं, इंसानियत और संवेदना में बसती है।यह दृश्य था – जदयू प्रत्याशी शुभानंद मुकेश और राजद प्रत्याशी रजनीश यादव का एक साथ खड़ा होना। दोनों प्रतिद्वंदी उम्मीदवार उस समय एक ही फ्रेम में नजर आए जब शुभानंद मुकेश की दादी मां, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष दिवंगत सदानंद सिंह की माता के निधन पर रजनीश यादव कहलगांव स्थित श्मशान घाट अंतिम दर्शन करने पहुंचे।राजनीतिक मतभेदों के बावजूद यह कदम न केवल संवेदना का प्रतीक था, बल्कि यह भी संदेश दे गया कि लोकतंत्र तब ही मजबूत होता है जब उसमें मानवीयता की जड़ें गहरी हों।

श्मशान घाट पर दोनों नेताओं के मिलने का क्षण लोगों के लिए प्रेरणादायक बन गया। आसपास मौजूद लोगों ने कहा – यही है बिहार की असली राजनीति, जहां विचारों की लड़ाई ज़रूर होती है, लेकिन दिलों में दूरियां नहीं। इस पल ने साबित कर दिया कि सत्ता की होड़ से परे भी संस्कार और संवेदना का रिश्ता कायम रह सकता है।

लोकतंत्र केवल वोट की ताकत नहीं, बल्कि विचारों की परिपक्वता और आपसी सम्मान की भावना से बनता है। यह तस्वीर हमें याद दिलाती है कि – विचारों में मतभेद रखिए, पर मन में वैर मत पालिए। राजनीति का मकसद विरोध नहीं, समाज की सेवा होना चाहिए। शुभानंद मुकेश और रजनीश यादव ने इस संदेश को अपने आचरण से जीवंत कर दिया है।

आज जब राजनीति में कटुता और आरोप-प्रत्यारोप आम हो चुके हैं, ऐसे दृश्य लोकतंत्र को नई दिशा देते हैं। यह सिर्फ एक तस्वीर नहीं, बल्कि एक सबक है – वोट से विचार बदलो, लेकिन दिलों में दूरी मत आने दो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *