नक्सल प्रभावित जिला खूंटी के इट्टे गांव से निकलकर अभय कुजूर जेपीएससी में द्वितीय टॉपर बने
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग परीक्षा में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले अभय कुजूर ने यह सिद्ध कर दिया कि कठिन परिस्थितियों में भी अगर हौसले को नहीं झुका पाएं, तो सफलता जरूर मिलती है। अभय खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड के उड़ीकेल पंचायत स्थित इट्टे गाँव के रहने वाले हैं, जो कि नक्सल प्रभावित और अत्यंत सुदूरवर्ती इलाकों में गिना जाता है।
अभय का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था। उनके पिता, स्वर्गीय अभिनाश कुजूर, भारतीय सेना में तैनात थे और वर्ष 2009 में ओडिशा में एक नक्सली हमले में शहीद हो गए। यह हमला इतना भीषण था कि उनके पार्थिव शरीर के टुकड़े-टुकड़े हो गए थे। मात्र एक किशोर उम्र में अपने पिता की ऐसी दशा देखकर अभय ने मन में ठान लिया कि वे एक दिन प्रशासनिक सेवा में जाएंगे और अपने क्षेत्र में बदलाव लाएंगे।
अभय की इस कठिन यात्रा में कर्रा दक्षिणी जिला परिषद सदस्य जोरोंग आइंद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने न केवल अभय को प्रेरित किया, बल्कि हर मोड़ पर उनका साथ भी दिया। श्री जोरोंग आइंद ने अपनी पूर्व नौकरी से इस्तीफा देकर जिला परिषद का चुनाव लड़ा और कर्रा दक्षिणी से निर्वाचित हुए। एक जनप्रतिनिधि के रूप में उन्होंने अभय का हर परिस्थिति में मार्गदर्शन किया और आर्थिक-सामाजिक सहयोग भी किया।
अभय ने सीमित संसाधनों और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी के बावजूद JPSC की तैयारी की। इट्टे गाँव आज भी विकास से कोसों दूर है — न पीने का स्वच्छ पानी है, न पक्की सड़क, न स्वास्थ्य केंद्र। बरसात में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि एम्बुलेंस भी गाँव तक नहीं पहुंच पाती।
इन विषम परिस्थितियों में पढ़ाई कर अभय ने जो उपलब्धि हासिल की है, वह सिर्फ उनके परिवार या गांव के लिए नहीं, बल्कि पूरे खूंटी ज़िले और झारखंड राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने साबित कर दिया कि सपने किसी विशेष वर्ग की संपत्ति नहीं होते — मजबूत इरादों और कठिन परिश्रम से कोई भी ऊंचाइयों को छू सकता है।



