अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद झारखंड प्रदेश के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल संतोष गंगवार से शिष्टाचार भेंट की
रांची :अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद झारखंड प्रदेश के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को राजभवन में राज्यपाल संतोष गंगवार से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने राज्य विश्वविद्यालय विधेयक 2025 में कुलपति नियुक्ति एवं विश्वविद्यालय संचालन से संबंधित प्रस्तावित प्रावधानों पर कड़ा विरोध जताते हुए महामहिम से विधेयक को स्वीकृति न देने का आग्रह किया।
प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम को सौंपे ज्ञापन में स्पष्ट किया कि विधेयक में प्रस्तावित प्रावधान विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता, अकादमिक स्वतंत्रता और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मूल सिद्धांतों के प्रतिकूल हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि विधेयक लागू होता है तो इससे उच्च शिक्षा का राजनीतिकरण बढ़ेगा और संस्थानों में अकुशल प्रशासन को बढ़ावा मिलेगा।
प्रदेश मंत्री मनोज सोरेन ने कहा कि विश्वविद्यालयों में कुलपति की नियुक्ति योग्यता और अनुभव के आधार पर होनी चाहिए, न कि राजनीतिक हस्तक्षेप से। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि विश्वविद्यालयों की प्रशासनिक प्रणाली को पारदर्शी और जवाबदेह बनाए रखने के लिए व्यापक संवाद और छात्रों, शिक्षकों तथा शिक्षाविदों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए।। इस विधेयक के कुछ प्रावधानों को विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता में हस्तक्षेप के रूप में देखा जा रहा है, जिससे अकादमिक स्वतंत्रता पर संकट उत्पन्न हो सकता है। कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि विश्वविद्यालयों के प्रशासन में अत्यधिक राजनीतिक दखल होता है, तो इससे शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होगा और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में गिरावट आ सकती है।साथ ही श्री सोरेन ने कहा कि सरकार विधेयक में दावा कर रही है कि कुलपति/ प्रति कुलपति की नियुक्ति में पारदर्शिता रहेगी लेकिन राज्य सरकार ये स्पष्ट करे की सरकार अपनी एजेंसी JPSC,JSSC सुचारू रूप से संचालन नहीं कर पा रही है तो हम किस आधार पर मान लें कि सरकार कुलपति/ प्रतिकुलपति की नियुक्ति कर पाएँगे ये सरकार आए दिन राज्य के युवाओं को बरगलाने का कार्य करती आ रही है
राज्यपाल संतोष गंगवार ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी चिंताओं पर विचार किया जाएगा।



