पूर्व कांग्रेस की विधायक अम्बा प्रसाद ने पुलिसिंग, अभियोजन व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए
रांची: पूर्व कांग्रेस विधायक अम्बा प्रसाद ने शनिवार को झारखंड न्यायिक अकादमी, रांची के बाहर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य की पुलिसिंग, अभियोजन व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री सह गृह मंत्री, झारखंड के नागरिकों, देशवासियों तथा सर्वोच्च न्यायालय और झारखंड उच्च न्यायालय के संज्ञान में एक अत्यंत गंभीर संवैधानिक और कानूनी विसंगति लाना चाहती हैं।
अम्बा प्रसाद ने बताया कि झारखंड के पुलिस थानों में प्रतिदिन दर्ज हो रही हजारों प्राथमिकी में अब भी दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 154 का उल्लेख किया जा रहा है, जबकि ये मामले हाल ही के हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई तकनीकी चूक नहीं, बल्कि कानून के खुले उल्लंघन का मामला है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि 1 जुलाई 2024 से देश में दंड प्रक्रिया संहिता को समाप्त कर उसकी जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता लागू हो चुकी है। इसके बावजूद वर्ष 2026 में भी झारखंड में NCRB के ऑनलाइन सिस्टम पर दर्ज हो रही प्राथमिकी में CrPC की धाराएं दर्शाई जा रही हैं, जबकि विधिक रूप से अब प्राथमिकी BNSS की धारा 173 के अंतर्गत दर्ज की जानी चाहिए।
पूर्व विधायक ने इसे “मृत कानून” को सरकारी दस्तावेजों में चलाने की संज्ञा देते हुए कहा कि यह स्थिति राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है। उन्होंने आश्चर्य जताया कि न तो प्रशासन, न अभियोजन विभाग और न ही राजनीतिक नेतृत्व ने अब तक इस त्रुटि को सुधारने की पहल की। यहां तक कि विधानसभा में भी इस मुद्दे पर कोई संज्ञान नहीं लिया गया।
अम्बा प्रसाद ने कहा कि यह मामला इसलिए और भी गंभीर है क्योंकि राज्य में नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, न्यायिक अकादमी और कई विधि महाविद्यालय संचालित हैं। बावजूद इसके, भावी वकीलों और न्यायाधीशों को आज भी गलत कानूनी प्रावधानों के आधार पर प्राथमिकी की प्रक्रिया पढ़ाई जा रही है, जो न्याय प्रणाली के साथ मज़ाक है।
उन्होंने मांग की कि इस गंभीर कानूनी विसंगति को अविलंब दुरुस्त किया जाए और राज्य सरकार इस पर तत्काल संज्ञान लेकर जवाबदेही तय करे।



