तीन वर्षों की वादाखिलाफी और पेंशनरों पर अत्याचार के विरोध में TMBU में पेंशनरों का धरना प्रदर्शन शुरू


भागलपुर। तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में गुरुवार को पेंशनरों का आक्रोश फूट पड़ा। कुलपति प्रो. जवाहर लाल द्वारा बीते तीन वर्षों में पेंशनभोगियों के साथ किए गए अत्याचार और समझौतों को निभाने में विफल रहने के विरोध में दर्जनों पेंशनरों ने काला बिल्ला लगाकर कुलपति कार्यालय के समक्ष धरना दिया। बंद पड़े कुलपति कक्ष के बाहर पेंशनरों का यह प्रदर्शन पूरे दिन चलता रहा और कल भी जारी रहेगा

धरने का नेतृत्व संघर्ष मंच के संयोजक पवन कुमार सिंह और सह संयोजक अमरेंद्र कुमार झा ने किया। प्रदर्शन में शामिल अन्य प्रमुख पेंशनरों में किशन कालजयी, अर्जुन प्रसाद, डी.एन. सिंह, तपन घोष, शैलेश्वर प्रसाद, बी.एन. सिंह, चंद्रेश, कामिनी दुबे, आर.एस. प्रसाद, संजय झा, एस.के. जिलोका, आशुतोष राजेश, विभाष झा, सुधांशु झा, गीता सिंह, गंगाधर चौधरी, अर्जुन यादव, अजय शर्मा आदि प्रमुख थे।

पेंशनरों ने आरोप लगाया कि कुलपति ने बार-बार किए गए समझौतों को तोड़ा है और वर्षों की सेवा देने वालों के साथ अन्याय किया है। उन्होंने कुलपति को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यदि उनमें थोड़ी भी मानवीय संवेदना शेष है तो वे स्वयं सामने आकर पेंशनरों से क्षमा मांगें।

कुलपति कक्ष में न बैठने पर उठे सवाल

धरना के दौरान कुलपति कक्ष में न बैठने को लेकर भी गहरी नाराजगी जाहिर की गई। सिंडिकेट सदस्य डॉ. के.के. मंडल और डॉ. निर्लेश कुमार ने भी धरने में शिरकत की और कुलपति के व्यवहार की कड़ी आलोचना की।

जब प्रॉक्टर प्रो. एस.डी. झा ने धरनार्थियों से अपील की कि वे कुलपति कक्ष के सामने से हटकर अन्यत्र प्रदर्शन करें, तो पेंशनरों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। इसी दौरान डॉ. के.के. मंडल और प्रॉक्टर के बीच तीखी बहस हो गई। डॉ. मंडल ने कहा, “शुक्र है कि इन वरिष्ठ नागरिकों की नज़र में अभी भी कुलपति कक्ष की मर्यादा बची है, इसीलिए ये लोग यहीं धरना दे रहे हैं। लेकिन अफसोस है कि कुलपति पूरे कार्यकाल में दस दिन भी अपने चेंबर में नहीं बैठे।”

डॉ. निर्लेश कुमार ने भी कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि कुलपति अपने “आवासीय किले” से बाहर निकलकर इस कक्ष में बैठते, तो विश्वविद्यालय का यह हाल न होता।

कुलपति पर लगे गंभीर आरोप

धरने में शामिल वक्ताओं ने कुलपति प्रो. जवाहर लाल पर विश्वविद्यालय की गरिमा को ठेस पहुँचाने और प्रशासनिक अराजकता फैलाने के आरोप लगाए। सभी ने एक स्वर में उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की और कहा कि जब तक पेंशनरों की मांगों को पूरा नहीं किया जाता, तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा।

धरना जारी रहेगा

धरना प्रदर्शन शुक्रवार को भी जारी रहेगा। पेंशनरों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो यह आंदोलन उग्र रूप ले सकता है।
विरोध की यह आवाज अब सिर्फ आर्थिक अन्याय के खिलाफ नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की गरिमा को पुनर्स्थापित करने की लड़ाई बन चुकी है।

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