झारखंड में पेशा कानून अधिनियम 1996 लागू करने की मांग को लेकर विभिन्न आदिवासी संगठनों ने गुमला से रांची राजभवन मार्च किया, राज्यपाल को सौंपा ज्ञापन

रांची : झारखंड में पेशा कानून अधिनियम 1996 लागू करने की मांग को लेकर केन्द्रीय सारण समिति और विभिन्न आदिवासी संगठनों ने गुमला से रांची राजभवन मार्च किया। साथ ही राज्यभावन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को ज्ञापन सौंपा है। चार दिवसीय कार्यक्रम के तहत आदिवासी संगठनों ने अपनी यात्रा पिछले 11 जुलाई को गुमला जिले के लिटा टोली से पंखराज बाबा कार्तिक उरांव के जन्म स्थल से नमन करते हुए निशा भगत के अगुवाई में गुमला जिले के सिसई, भरनो, बेड़ो, कटहल मोड़, होते हुए13 जिलाई को रात्रि में रांची के आईटी आई बजरा पहुंचा।14 को केन्द्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा की अगुवाई में विभिन्न आदिवासी, धार्मिक सामाजिक संगठनों के सैकड़ों कार्यकर्ताओ ने आईटी आई बजरा पहुंच कर गुमला से पदयात्रा कर रांची पहुंचने वाले सभी आदिवासी अगुवाओं का फुल माला एवं अंगवस्त्र देकर उनका गर्म जोशी के साथ स्वागत किया । उसके बाद केन्द्रीय सरना समिति के नेतृत्व में बबलू मुंडा की अगुवाई में आईटीआई -बजरा से राजभवन मार्च किया गया और पेसा कानून अधिनियम 1996 को अविलम्ब लागु करने को लेकर राज्यपाल को माँग पत्र सौपा । वहीं केन्द्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने कहा कि पेसा कानून अधिनियम 1996 को क्यों लागु करने की माँग की जा रही है क्योंकि इस पेसा कानून से आदिवासी समाज के एवं झारखण्ड के विभिन्न जिलों के पाहन,पईनभोरा,कोटवार, महतो, मानकी मुण्डा, बैगा आदि जैसे लोगों को मिलने वाले अधिकार संरक्षित हो सके । श्री मुंडा ने कहा कि पेसा कानून अधिनियम 1996पेसा कानून पंचायत अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार अधिनियम 1996 भारत में अनुसूचित क्षेत्रों पांचवीं अनुसूची में रहने वाले आदिवासी समुदायों को स्वशासन और उनके प्राकृतिक संसाधनों पर अधिकार प्रदान करने के लिए बनाया गया है । यह कानून 24 दिसंबर 1996 को लागू हुआ और इसका उद्देश्य ग्राम सभाओं को सशक्त बनाना आदिवासियों के पारंपरिक अधिकारों की रक्षा करना और जल जंगल जमीन जैसे संसाधनों पर उनके नियंत्रण को सुनिश्चित करना है। यह कानून संविधान के अनुच्छेद 243 M के तहत संसद द्वारा पारित किया गया और हेमंत सोरेन सरकार आदिवासियों की परंपरागत व्यस्था को नष्ट करने में लगी है । एक विशेष समुदाय को लाभ पहुंचाने के लिए, आदिवासियों की धर्म संस्कृति रीति रिवाज रुढ़िवादी प्रथा को खत्म करना चाहती है। इसलिए हेमंत सोरेन सरकार झारखंड में पेसा कानून अधिनियम 1996 लागू नहीं कर रही है । मुख्य पहान जगलाल पहान ने कहा कि पेसा अधिनियम 1996 में 23 प्रावधान और अधिनियम में कुल 17 धाराएँ हैं। इसके अंतर्गत विभिन्न प्रावधान ग्राम सभाओं और पंचायतों को शक्तियाँ प्रदान करती है।
उन्होंने कहा कि इस अधिनियम के लागू होने ग्राम सभाओं को जल, जंगल, जमीन पर पूर्ण नियंत्रण होगा । लघु खनिजों के प्रबंधन और उपयोग का अधिकार मिलता है । भूमि अधिग्रहण में ग्राम सभा की सहमति मिलती है । स्थानीय विवादों को सुलझाने की शक्ति सहित इसके नियमों के बारे में उन्होंने उल्लेख किया।
अशोक मुंडा ने कहा कि राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से आग्रह किया कि आदिवासी समाज के इन अधिकारों को ध्यान में रखते हुए जल्द से जल्द पेसा कानून अधिनियम 1996 को लागू करने किया जाए । इससे जनजाति क्षेत्र में स्वशासन एवं विकास ग्राम सभा को प्राप्त होगा प्राप्त होगा और में जनजाति क्षेत्र में अपनी पारंपरिक रीति रिवाज रीति रिवाज धर्म संस्कृति भाषा को विकास एवं विस्तार करने का अवसर प्राप्त होगा। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से केन्द्रीय सरना समिति अध्यक्ष बबलू मुंडा, मुख्य पहान जगलाल पहान, अशोक मुंडा महादेव टोप्पो,बिरसा, पहान निशा भगत, एंजेल लकड़ा, खुशबू, अमित मुंडा, मुकेश मुंडा, मुन्ना हेमरोम, अरूण पहान, विशाल मंडा, संतोष मुंडा, महादेव मुंडा, राकेश मुंडा, धन सिंह मुंडा, सुनील केरकेट्टा,समीर, मनीष मुंडा, राहुल मुंडा, पवन लोहार, धीरज केस्पोटा, अमित मुंडा, अशोक मुंडा, सूरज मिंज,अमर टोप्पो, शंभू टोप्पो, पूजा मुंडा, शशि टोप्पो, दीपक टोप्पो, नेहा हेंब्रम, कविता मुंडा, देवांती मुंडा, एवं अन्य सैकड़ों की संख्या में उपस्थित थे।

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