धर्मांतरण के खिलाफ आदिवासियों की हुंकार, रांची में सरना महा बचाओ रैली का आयोजन
रांची: झारखंड में धर्मांतरण का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ता जा रहा है। इसी कड़ी में रविवार को राजधानी रांची के दस माइल जतरा मैदान में आदिवासी सरना समाज ने विशाल सarna बचाओ महारैली का आयोजन किया। इस रैली में झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और उड़ीसा से भी बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने एकस्वर में चंगाई सभा के माध्यम से किए जा रहे धर्मांतरण का विरोध किया और अपनी धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की मांग उठाई।
रैली को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ के पूर्व विधायक एवं आदिवासी नेता गणेश राम भगत ने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी जीवन के तीन प्रमुख स्तंभ हैं। उन्होंने चेताया कि चंगाई सभा के नाम पर आदिवासी समाज को बहकाकर ईसाई बनाया जा रहा है। यह न केवल उनके धार्मिक अस्तित्व, बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों के लिए भी खतरा है। उन्होंने कहा कि हमारे पुरखों ने इन संसाधनों और परंपराओं को बचाने के लिए संघर्ष किया था, इसलिए अब समाज को एकजुट होकर उनकी विरासत की रक्षा करनी होगी।
रैली की संयोजक मेघा उरांव ने आरोप लगाया कि ईसाई मिशनरी समूह असाध्य बीमारी ठीक करने का दावा कर भोले-भाले सरना अनुयायियों को लक्ष्य बना रहे हैं। कई जगहों पर बिना ग्रामसभा की अनुमति के चंगाई सभा का आयोजन हो रहा है, जो परंपरागत पंचायत व्यवस्था का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य के कई सीमावर्ती क्षेत्रों—विशेषकर दुमका, पाकुड़ और संथाल परगना—में बड़ी संख्या में घुसपैठ हो रही है। बाहरी लोग आदिवासी समुदाय की युवतियों से विवाह कर बस रहे हैं और धीरे-धीरे उन्हें धर्म परिवर्तन की ओर धकेल रहे हैं।
रैली में उपस्थित महिलाओं ने भी धर्मांतरण के खिलाफ अपनी आवाज मुखर की और सरना धर्म को बचाने की दृढ़ प्रतिज्ञा दोहराई। कार्यक्रम की अध्यक्षता ग्राम गुंदू के ग्राम प्रधान राम पाहन ने की। इस अवसर पर पूर्व विधायक राम कुमार पाहन, सोमा उरांव, संदीप उरांव, बुधराम बेड़ियां, अजय भोक्ता, सन्नी टोप्पो, अंजली लकड़ा, भीम सिंह मुंडा, रूपेश बेड़ियां सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। रैली में उमड़ी भीड़ ने साफ संदेश दिया कि सरना आदिवासी समाज अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए पूरी तरह संगठित है।



