3सेंटीमीटर में दशानन का अंत: बिहार के मधुरेंद्र ने चाकू से पत्ते पर रचा ‘रामायण’
भागलपुर। जहां पूरा देश विजयदशमी की गूंज में रावण दहन देख रहा था, वहीं बिहार के एक कलाकार ने बुराई के अंत की कहानी… एक पत्ते पर लिख दी। देश के मशहूर लीफ आर्टिस्ट मधुरेंद्र कुमार ने दशहरा पर पीपल के महज़ तीन सेंटीमीटर के पत्ते पर नुकीले चाकू की धार से वह कर दिखाया, जिसे देखकर हर कोई दंग है – राम द्वारा रावण वध की झलक दिखाती सूक्ष्म कलाकृति।
करीब 5 घंटे की मेहनत के बाद, पीपल के हरे पत्ते पर राम के तीर से धराशायी होते दशमुखी रावण की छवि उकेर, मधुरेंद्र ने लिखा – हैप्पी दशहरा।
इतना ही नहीं, उन्होंने इस पावन मौके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने पर भी अपनी कला से बधाई दी – एक और पत्ते पर लिखा: “राष्ट्र सेवा के 100 वर्ष। बिना शब्दों के भी संदेश दे देने वाली मधुरेंद्र की यह कलाकृति अब सोशल मीडिया पर धड़ल्ले से वायरल हो रही है। फेसबुक से लेकर इंस्टाग्राम तक, लोग इस अनोखी कलाकारी को साझा करते हुए तारीफों के पुल बांध रहे हैं।
मधुरेंद्र ने मीडिया से बात करते हुए कहा, दशहरा केवल पुतलों का दहन नहीं, आत्मचिंतन का पर्व है। रावण बाहर जलाना आसान है, लेकिन भीतर के रावण को समाप्त करना ही असली विजय है। संघ को समर्पित कला, देश को समर्पित संदेश
शताब्दी वर्ष मना रहे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अपनी कलाकृति के माध्यम से बधाई देते हुए मधुरेंद्र ने राष्ट्र सेवा की भावना को भी उकेरा। उनका संदेश साफ था – कलम, कला और कटार – जब राष्ट्र के लिए हों, तभी सृजन पवित्र होता है।
बेचेंगे स्वदेशी, खरीदेंगे स्वदेशी – दुर्गा के संग उठाया स्वदेशी का संदेश। कुछ दिन पहले, मधुरेंद्र ने मां दुर्गा की एक और सुंदर तस्वीर लीफ आर्ट में उकेरी थी। शेर पर सवार दुर्गा भवानी के नीचे लिखा था – बेचेंगे स्वदेशी, खरीदेंगे स्वदेशी – एक मजबूत संदेश भारत की आर्थिक आत्मनिर्भरता को लेकर।
जब पत्ते बनें पहचान – लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड तक पहुंची कला। मधुरेंद्र की यह कोई पहली कलाकृति नहीं। बचपन से पत्तों पर उकेरते-उकेरते उन्होंने 5,000 से अधिक अद्वितीय लीफ आर्ट तैयार किए हैं।आज उनका नाम लंदन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज है। उनकी कृतियों में देवी-देवता, स्वतंत्रता सेनानी, पर्यावरण चेतना, महिला सशक्तिकरण, नशा मुक्ति से लेकर वोटिंग अवेयरनेस तक, हर सामाजिक विषय की बारीक झलक देखने को मिलती है। पत्ते पर जितनी बारीकी, उतना गहरा संदेश। मौके पर मौजूद प्रबुद्धजनों ने मधुरेंद्र की कला को न केवल सराहा, बल्कि इसे कलात्मक राष्ट्रभक्ति की मिसाल बताया।



