संघ का शताब्दी वर्ष: कहलगांव की धरती पर गूंजा ‘भारत माता की जय’
भागलपुर। शौर्य, सेवा और संस्कार का संगम बना कहलगांव, जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अपने शताब्दी वर्ष का विजयदशमी उत्सव ऐतिहासिक किला दुर्गा स्थान बस्ती में मनाया। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि संघ के 100 वर्षों की राष्ट्र साधना का साक्षात् उत्सव बन गया।
कार्यक्रम का आरंभ भारतीय परंपरा के अनुरूप शस्त्र पूजन से हुआ। अध्यक्ष प्रसादी साहनी, बौद्धिक कर्ता अशोक कुमार और बस्ती प्रमुख राजकुमार सरसहाय ने वैदिक मंत्रों के बीच शस्त्र पूजन कर वीरता और संयम का संदेश दिया। मुख्य वक्ता अशोक कुमार ने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा, “यह शताब्दी वर्ष केवल उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन और राष्ट्र पुनर्निर्माण की दिशा में नए संकल्पों का अवसर है। उन्होंने 1925 में डॉ. हेडगेवार द्वारा संघ की स्थापना से लेकर आज तक की संघ यात्रा का वर्णन करते हुए कहा, “नागपुर के छोटे बाल स्वयंसेवकों से शुरू हुआ यह आंदोलन आज विश्व का सबसे बड़ा सांस्कृतिक संगठन बन चुका है। शताब्दी वर्ष में संघ का लक्ष्य है – हर घर तक संघ, हर हृदय तक सेवा और संस्कार। उन्होंने बताया कि देशभर में संघ के हजारों सेवा प्रकल्प चल रहे हैं, जो भारत को फिर से विश्वगुरु बनाने की दिशा में अग्रसर हैं।
शस्त्र पूजन और उद्बोधन के बाद, संघ स्वयंसेवकों का अनुशासित पथ संचलन किला दुर्गा मंदिर, पुरानी बाजार, सदर अस्पताल, विशहरी स्थान, कालीघाट होते हुए मध्य विद्यालय कागजी टोला तक निकाला गया। रास्तेभर स्वयंसेवकों की पंक्तियाँ, कदमों की ताल और भारत माता की जय के उद्घोष ने वातावरण को देशभक्ति से सराबोर कर दिया।
इस आयोजन में दुर्गा स्थान बस्ती के समस्त कार्यकर्ता, सह जिला कार्यवाह सुसज्जन कुमार, खंड कार्यवाह पवन कुमार समेत बड़ी संख्या में नागरिकों और स्वयंसेवकों की उपस्थिति रही।



