बारिश नहीं रोक सकी भक्तों का कारवां, डीजे की धुन पर भीगा ‘विसर्जन’

भागलपुर। विजयदशमी के साथ ही दुर्गा पूजा का समापन भी हो रहा था, लेकिन तीन दिन की लगातार बारिश ने शहर को भिगो दिया। पर अगर किसी ने बारिश को मात दी, तो वो थे मां के भक्त।छाता हो या प्लास्टिक की पन्नी, श्रद्धालु हर हाल में मां दुर्गा की प्रतिमा को नाचते-गाते विसर्जन स्थल तक ले जा रहे थे। सड़कों पर भरा पानी हो या फिसलन – आस्था के सामने सब बेबस नज़र आए।डीजे की धुन पर झूमती महिलाएं, ट्रैक्टर पर सजी प्रतिमाएं, बच्चों की जयकार और बीच-बीच में अगले बरस तू जल्दी आ… की गूंज – यह महज विसर्जन नहीं, एक चलती-फिरती संस्कृति थी। हम मां को विदा कर रहे हैं, लेकिन ये विदाई भी एक उत्सव है। किसी श्रद्धालु की आवाज बारिश की बूंदों के पार सुनाई दी।जिले मे कुल 244 जगहों पर प्रतिमा स्थापित की गई थी। गत गुरुवार को भी कई स्थानों की प्रतिमा का विसर्जन हुआ।आयोजकों ने भी बारिश से निपटने के लिए पूरी तैयारी कर रखी थी। बड़ी मूर्तियां ट्रकों पर, कपड़े और तिरपाल से ढकीं, और लोगों का उत्साह ऐसा कि हर कोई भीगकर भी मुस्कुरा रहा था।त्योहारों की धरती बना भागलपुरभागलपुर इस बार केवल धार्मिक भावनाओं का केंद्र नहीं रहा, यह उत्सव की ज़िंदा तस्वीर बन गया। एक ओर रावण दहन ने बुराई के अंत का साक्षात् प्रदर्शन किया, तो दूसरी ओर दुर्गा विसर्जन ने आस्था की गहराई को उजागर किया।
बारिश आई, पर उत्साह नहीं गया। रावण जला, पर सौहार्द बरकरार रहा। यही है भागलपुर। जहां पर्व केवल दिन नहीं, एक एहसास होते हैं।

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