साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती मनाई गई
खूंटी: हिंदी उर्दू साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 146वीं जयंती विश्व बांग्ला हिंदी संगम परिषद के तत्वावधान में भगतसिंह चौक में मनाई गई। उपस्थित साहित्य प्रेमियों ने मुंशी प्रेमचंद के छाया चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्व बांग्ला हिंदी संगम परिषद के अध्यक्ष डॉ दीपक कुमार घोष ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद हिन्दी और उर्दू साहित्य के महान लेखक थे। उनका जन्म 31जुलाई 1880 ई को यूपी के लमही गांव में हुआ था। साहित्य में उन्होंने उत्कृष्ट कहानियां और उपन्यास की रचना की। गरीबों किसानों और मजदूरों के जीवन का सजीव चित्रण किया। जिन्हें साहित्य जगत कभी नहीं भुला सकता है। मुरहू के मशहूर कवि, लेखक और व्यंग्यकार डॉ धर्मेंद्र नाथ तिवारी ने कहा कि मुंशी जी का जीवन बहुत ही संघर्षमय बीता।उनकी रचनाएं मील का पत्थर हैं। उनके साहित्य में पात्रों का सत्य एवं मार्मिक चित्रण रोंगटे खड़े कर देता है।उनकी कहानियों में बुढ़ी काकी,पुस की रात,नमक का दारोगा, कफ़न,पंच परमेश्वर, ईदगाह आदि प्रमुख हैं,गबन,गोदान, सेवासदन, कर्मभूमि सहित कई उपन्यास हैं। मुंशी प्रेमचंद जी के साहित्य संसार का सूर्य हैं। इन्हें जीवंत और मर्मस्पर्शी लेखों के लिए कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। जीवन का अंतिम समय भी इनका कष्टमय रहा। अंग्रेजी हुकूमत में भी इनका स्वाभिमान बना रहा। हमारी हार्दिक श्रद्धांजलि हैं। मौके पर अनुप कुमार राय, जितेन्द्र पांडे, तुलसी प्रजापति, प्रफुल्ल भगत, ध्रुवेन्द्र भास्कर, राधेश्याम भगत, डॉ पी के विश्वास, किशोर ठाकुर सहित कई साहित्य प्रेमियों ने श्रद्धांजलि अर्पित की।


