पहाड़ी मंदिर की अव्यवस्था और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर संघर्ष समिति की बैठक, हाईकोर्ट में पीआईएल दायर करने का निर्णय

रांची: राजधानी रांची स्थित पहाड़ी मंदिर में व्याप्त अव्यवस्था, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और कथित भ्रष्टाचार के मुद्दों को लेकर रविवार को पहाड़ी मंदिर विकास संघर्ष समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक मंदिर परिसर में आयोजित की गई। बैठक में मंदिर की व्यवस्था सुधारने और विभिन्न अनियमितताओं के खिलाफ आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में समिति की ओर से सात प्रमुख मुद्दे उठाए गए। समिति ने मांग की कि पहाड़ी मंदिर की 26 एकड़ 13 कड़ी जमीन की विधिवत नापी के बाद ही बाउंड्री वॉल का निर्माण कराया जाए। साथ ही वर्ष 1992 से मंदिर की व्यवस्था संभाल रही पहाड़ी मंदिर विकास समिति से अब तक के आय-व्यय का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक करने की मांग की गई।
श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर भी चिंता जताई गई। समिति ने कहा कि विभिन्न मंडलों और समितियों द्वारा दिनभर मुख्य मंदिर को घेरकर आरती और श्रृंगार करने से आम श्रद्धालुओं को परेशानी होती है। इसलिए आरती केवल सुबह और शाम में ही आयोजित की जाए, जिसमें सभी समितियां संयुक्त रूप से भागीदारी निभाएं।
बैठक में पर्यटन विभाग द्वारा मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए स्वीकृत 6 करोड़ 74 लाख रुपये की राशि के उपयोग की जांच की मांग भी उठी। इसके अलावा समिति ने पहाड़ी मंदिर की प्राचीन खोडालाइट चट्टानों के संरक्षण पर जोर देते हुए कहा कि पहाड़ी क्षेत्र पहले भी दो बार भूस्खलन का सामना कर चुका है, इसलिए सुरक्षा और संरक्षण के ठोस उपाय जरूरी हैं।
समिति ने मंदिर परिसर में बढ़ती असुरक्षा, नशेड़ियों और शराबियों के जमावड़े पर भी चिंता जताई। वहीं मुख्य द्वार और सीढ़ियों में लगाए गए निम्न गुणवत्ता वाले निर्माण सामग्री की जांच की मांग की गई।
समिति ने चेतावनी दी कि यदि इन मुद्दों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो जल्द ही झारखंड हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी। बैठक में लाल ऋषिनाथ शहदेव, सुजीत सिंह, निशांत यादव, सुनील साहू, संजय तिवारी, अजय जायसवाल, रवि सिन्हा, पुनम सिंह समेत बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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