सात राज्यों के विद्यार्थियों को पछाड़कर डीपीएस बोकारो का राघव बना नंबर-1 बाल-वैज्ञानिक
बोकारो : दिल्ली पब्लिक स्कूल बोकारो के एक और प्रतिभावान छात्र ने विद्यालय का नाम शैक्षणिक उपलब्धियों के सुनहरे पन्ने में दर्ज किया है। देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित वैज्ञानिक प्रतिभा-खोज प्रतियोगिताओं में से एक विद्यार्थी विज्ञान मंथन (वीवीएम) 2025-26 में विद्यालय के होनहार छात्र राघव कृष्णा ने वह कारनामा कर दिखाया है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा है। छठी कक्षा के छात्र राघव ने सात राज्यों के प्रतिभागियों को परास्त कर सेंट्रल जोन (केंद्रीय क्षेत्र) में ऐतिहासिक प्रथम स्थान (रैंक 1) हासिल किया है। गुजरात के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गांधीनगर में 16 और 17 मई 2026 को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शिविर (नेशनल लेवल कैम्प) में राघव ने यह अद्वितीय गौरव प्राप्त किया। झारखंड को देश के सबसे कठिन माने जाने वाले सेंट्रल जोन में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों के साथ रखा गया था। राघव ने अपनी अचूक मेधा और दृढ़ संकल्प के बल पर उक्त राज्यों के प्रतिभागियों को पछाड़कर नंबर- 1 बाल वैज्ञानिक बनने का गौरव पाया। उसे मोमेंटो एवं प्रमाणपत्र के अलावा 5,000 रुपए की पारितोषिक राशि दी गई और अगले एक वर्ष तक प्रतिमाह 2,000 रुपए की प्रतिष्ठित राष्ट्रीय छात्रवृत्ति भी दी जाएगी। भविष्य में राघव को आईआईटी गांधीनगर के वरिष्ठ वैज्ञानिकों द्वारा सीधे तौर पर मेंटरशिप (मार्गदर्शन) का अनमोल अवसर भी मिलेगा।
*राष्ट्रीय सृजन इंटर्नशिप कार्यक्रम में झारखंड से एकमात्र चयनित, प्राचार्य ने किया सम्मानित*
इस कामयाबी के लिए राघव का चयन देश के सबसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सृजन इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए भी हुआ है। यह मौका पानेवाला वह झारखंड का एकमात्र विद्यार्थी है। इस इंटर्नशिप के तहत वह इसरो, आईआईएसईआर, भोपाल और आईआईटी बॉम्बे आदि में जाकर वैज्ञानिकों के साथ सीधे तौर पर काम सीख सकेगा। यह ऐतिहासिक सफलता पाकर लौटने के बाद मंगलवार को विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने राघव को सम्मानित किया। उसकी कामयाबी को विद्यालय के साथ-साथ पूरे राज्य के लिए गौरव बताते हुए उन्होंने कहा कि विद्यालय अपने छात्र-छात्राओं की प्रतिभा को निखारने का हर अवसर और मंच देता है। ऐसी उपलब्धियां बच्चों की मेहनत व शिक्षकों के मार्गदर्शन का सुखद परिणाम हैं। इस सफलता के लिए राघव ने भी विद्यालय के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। विज्ञान भारती (विभा) की पहल के तहत भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और एनसीईआरटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाली इस राष्ट्रीय परीक्षा का उद्देश्य देश के कोने-कोने से छुपी हुई बाल-वैज्ञानिक प्रतिभाओं को तराशना और उन्हें भारतीय विज्ञान प्रणाली से अवगत कराना है। इस वर्ष की प्रतियोगिता में भारत के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शीर्ष दो-दो विजेताओं के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, मस्कट और अन्य खाड़ी देशों के अंतरराष्ट्रीय स्कूलों के कुल 468 सर्वश्रेष्ठ मेधावियों ने हिस्सा लिया था।
*16 घंटे के कड़े इम्तिहान में हर कसौटी पर उतरा खरा*
आईआईटी गांधीनगर में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय शिविर कोई आम परीक्षा नहीं थी। दो दिनों के भीतर 16 घंटे से भी अधिक समय तक चली इस अनवरत दिमागी कसरत में विद्यार्थियों की योग्यता को कई स्तरों पर परखा गया, जिसमें गणित और विज्ञान से जुड़े जटिल प्रयोग, व्यक्तिगत साक्षात्कार, प्रस्तुति कौशल, डिजाइन थिंकिंग और रचनात्मक सोच जैसी अत्यंत कठिन विधाएं शामिल थीं। राघव की यह यात्रा पिछले वर्ष 28 अक्टूबर से 2 नवंबर 2025 के बीच आयोजित प्रथम चरण की देशव्यापी ऑनलाइन परीक्षा से शुरू हुई थी। प्रथम स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद जनवरी में विद्यालय के तीन छात्र झारखंड में अव्वल रहे थे और राघव के साथ-साथ चार छात्रों का चयन राष्ट्र स्तर पर हुआ था। इसमें राघव ने अंततः बाजी मार ली।
*आईएएस अफसर बनना चाहता है राघव, सोशल मीडिया है दूर*
राघव ने कहा कि वह आगे चलकर एक आईएएस अधिकारी बनना चाहता है। गरीबों के जीवनस्तर में सुधार और समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना उसकी इच्छा है। वह अपने दादाजी स्व. के.पी. सिंह के जीवन के संघर्षों से गहरा प्रेरित है। ओएनजीसी की अधिकारी डॉली कुमारी एवं व्यवसायी चंदन कृष्णा के पुत्र राघव ने अपनी सफलता का मंत्र साझा करते हुए बताया कि वह रोजाना 5 घंटे नियमित पढ़ाई करता है। सोशल मीडिया से पूरी तरह दूर है और मोबाइल का उपयोग केवल पढ़ाई से जुड़े कंटेंट को देखने के लिए ही करता है। पढ़ाई के अलावा राघव को क्रिकेट खेलना, साइकिलिंग करना, गाने सुनना और प्रेरणादायक किताबें पढ़ना बेहद पसंद है।विद्यार्थी विज्ञान मंथन एक विज्ञान आधारित राष्ट्रीय प्रतियोगी परीक्षा है, जिसका आयोजन विज्ञान भारती द्वारा किया जाता है। यह राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, जो कि शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत कार्यरत है तथा राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद, जो कि संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत एक स्वायत्त संस्था है, के सहयोग से संचालित होता है। इसे कक्षा 6 से 11 तक के विद्यार्थियों के लिए बनाया गया है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की पहचान करना और उन्हें प्रोत्साहित करना है। यह कार्यक्रम नई शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और भारत की वैज्ञानिक विरासत के प्रति जागरूकता विकसित करता है।



