आदिवासी धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थल पर बाउंड्री निर्माण का विरोध, फर्जी दस्तावेज के जरिए जमीन हड़पने का कोर्शिश
रांची: राजधानी रांची में अवैध जमीन कब्जा और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से भूमि हड़पने के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। आरोप है कि शहर के कई क्षेत्रों में आदिवासियों की धार्मिक एवं खेतीहर जमीनों पर गैर-आदिवासियों द्वारा कब्जे की कोशिश की जा रही है।
ताजा मामला कोकर स्थित गुरगुट मैदान का है, जहां आदिवासी समाज की धार्मिक जतरा एवं धुमकुड़िया से जुड़ी जमीन पर कथित रूप से रात के अंधेरे में बाउंड्री निर्माण कर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कुछ जमीन माफिया जबरन बाउंड्री निर्माण का कार्य करा रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता अजय तिर्की ने बताया कि प्लॉट संख्या 118 एवं 121 आदिवासी समुदाय की जमीन है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग फर्जी एवं डुप्लीकेट दस्तावेज तैयार कर स्वयं को जमीन का मालिक बताकर भोले-भाले आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संबंधित जमीन के दस्तावेजों की जांच कराई जाएगी तथा फर्जी कागजात तैयार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जाएगी।
अजय तिर्की ने बताया कि उक्त जमीन पर वर्षों से धुमकुड़िया एवं जतरा का आयोजन होता रहा है, जहां आदिवासी समाज अपने धार्मिक अनुष्ठान, पूजा-पाठ एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।
वहीं, सरना समिति की अध्यक्ष निर्मला मुंडा ने कहा कि धार्मिक जमीनों पर हो रहे कथित अतिक्रमण से ग्रामीणों में भारी नाराजगी और चिंता है। उन्होंने कहा कि यदि समाज के लोग उनकी मदद नहीं करेंगे तो वे न्याय के लिए आखिर किसके पास जाएंगे।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ बिचौलियों और दलालों के माध्यम से जमीन की खरीद-बिक्री की जा रही है, जिसका असर आदिवासी जमीनों पर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में बाहरी लोगों के साथ-साथ कुछ स्थानीय लोगों की भी संलिप्तता हो सकती है।
ग्रामीणों एवं सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।



