अब दिल की बीमारी नहीं बनेगी मजबूरी, अंग क्षेत्र के बच्चों को मेदांता पटना में मिलेगा विश्वस्तरीय और निःशुल्क हार्ट ट्रीटमेंट
भागलपुर। जिस बच्चे की सांस फूलती हो, दूध पीते समय पसीना आने लगे या शरीर का रंग नीला पड़ जाए। अब उसके माता-पिता को घबराने या राज्य से बाहर भटकने की जरूरत नहीं है। भागलपुर और आसपास के जिलों के बच्चों के लिए दिल के छेद और जन्मजात हृदय रोगों का इलाज अब पटना में, वह भी पूरी तरह निःशुल्क और विश्वस्तरीय सुविधाओं के साथ उपलब्ध होगा। इस राहत भरी घोषणा के साथ जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, पटना ने बुधवार को होटल वैभव, भागलपुर में एक विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। उद्देश्य साफ था। अंग क्षेत्र के लोगों को यह संदेश देना कि अब बच्चों के दिल की बीमारी लाचारी नहीं, इलाज योग्य है।
प्रेस वार्ता में मेदांता पटना के पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. आशीष सप्रे, आईएपी भागलपुर एवं जीवन जागृति समिति के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह और समिति के सचिव सोमेश कुमार ने संयुक्त रूप से इस अभियान की रूपरेखा साझा की। डॉ. आशीष सप्रे ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘यदि बच्चे का वजन नहीं बढ़ रहा है, दूध पीते वक्त पसीना आता है या बार-बार सांस फूलती है, तो यह जन्मजात हृदय रोग का संकेत हो सकता है। समय पर जांच और इलाज से बच्चे का जीवन पूरी तरह सामान्य हो सकता है।’ उन्होंने बताया कि बिहार सरकार के साथ पीपीपी मॉडल के तहत मेदांता पटना में बच्चों की हार्ट सर्जरी और इलाज पूरी तरह निःशुल्क है।पिछले एक साल में हमने 500 से अधिक बच्चों का सफल इलाज किया है। अब भागलपुर, बांका और मुंगेर के बच्चों को भी यही सुविधा सुलभ कराई जाएगी।
आईएपी भागलपुर और जीवन जागृति समिति के अध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह ने इस पहल को अंग क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक बताया। उन्होंने कहा, ‘अब किसी बच्चे की जान सिर्फ इसलिए नहीं जाएगी क्योंकि उसके माता-पिता इलाज का खर्च नहीं उठा सकते। आईएपी और जीवन जागृति समिति यह सुनिश्चित करेगी कि सही समय पर सही जगह इलाज मिले।’ उनके मुताबिक, बाल रोग विशेषज्ञों और स्वास्थ्य कर्मियों का नेटवर्क इस पूरी प्रक्रिया में सेतु का काम करेगा।
जीवन जागृति समिति के सचिव सोमेश कुमार ने कहा कि सिर्फ इलाज नहीं, जागरूकता सबसे बड़ा हथियार है। हम सुदूर गांवों तक जाकर लोगों को बताएंगे कि सरकारी योजनाओं और मेदांता की इस सुविधा का लाभ कैसे उठाया जाए। जानकारी के अभाव में कोई बच्चा इलाज से वंचित न रहे।
कार्यक्रम में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) से जुड़े जिला समन्वयकों की सक्रिय भागीदारी ने इस पहल को और मजबूती दी। डॉ. अनमोल आनंद (जिला समन्वयक, आरबीएसके, भागलपुर),डॉ. भावना (आरबीएसके, जेएलएनएमसीएच भागलपुर), डॉ. अमित कुमार (जिला समन्वयक, आरबीएसके, बांका), डॉ. संजय कुमार (जिला समन्वयक, आरबीएसके, मुंगेर)। इन सभी ने बताया कि स्कूलों, आंगनबाड़ियों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से बच्चों की स्क्रीनिंग कर उन्हें मेदांता पटना रेफर किया जाएगा। आईएपी भागलपुर के सचिव डॉ. सुदर्शन ने बाल रोग विशेषज्ञों से अपील की कि हृदय रोग के लक्षण दिखते ही बच्चों को समय रहते रेफर करें। एक छोटी सी सतर्कता किसी बच्चे का पूरा जीवन बचा सकती है।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस ने साफ कर दिया कि अब भागलपुर और अंग क्षेत्र के बच्चों के लिए दिल की बीमारी अभिशाप नहीं, इलाज योग्य चुनौती है।
मेदांता, आईएपी, जीवन जागृति समिति और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के साझा प्रयास से हजारों मासूम जिंदगियों में उम्मीद की नई धड़कन सुनाई देने लगी है।



