मां की चीत्कार, मासूम बेटे की चुप्पी और तिरंगे में लिपटा वीर, बाढ़ में विदा हुआ भारत मां का लाल

भागलपुर। बाढ़ की मिट्टी भी आज लाल हो गई थी…
पानी की हर बूंद में एक मां की चीत्कार थी, एक पत्नी की टूटती उम्मीदें थीं, और एक मासूम बेटे की अबूझ चुप्पी थी। रंगरा प्रखंड के चापर गांव में जब शहीद जवान अंकित यादव (35) का पार्थिव शरीर पहुंचा, तो पूरा गांव सन्न हो गया। हर आंख नम, हर दिल भारी।

शहीद अंकित यादव का अंतिम संस्कार घुटने भर पानी में किया गया। जहां आमतौर पर अग्नि की लपटें आकाश को छूती हैं, आज वहां पानी था—खामोश, ठहरा हुआ, जैसे वो खुद भी इस वीर सपूत को सैल्यूट कर रहा हो।
शुक्रवार दोपहर बाद जब शहीद अंकित की अंतिम यात्रा निकली, तो इससे पहले उनके अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर को कौफिन में रखा गया। इस दौरान जब सलामी देने की बारी अंकित की पत्नी की आई तो हाथों में मेंहदी लगाई और लाल जोड़े में पहुंची रूबी कुमारी ने पहले पति को सलामी दी, फिर कौफिन से लिपटकर रोने लगी। उन्हें बार-बार पीछे किया जा रहा था, हटाया जा रहा था, लेकिन रूबी पति के पार्थिव शरीर से अलग नहीं होना चाह रही थी।

सबसे भावुक क्षण तब आया, जब अंकित के चार साल के बेटे ने कांपते हाथों से अपने पिता को मुखाग्नि दी। उस पल, आकाश भी रो पड़ा—मूसलाधार बारिश नहीं थी, लेकिन हर इंसान की आंखों से गिरती बूंदें किसी कम बारिश से कम नहीं थीं।

शहीद का पार्थिव शरीर जब बाढ़ से घिरे गांव में पहुंचा, तो सेना की गाड़ी कीचड़ में फंस गई। फिर, गांव के युवाओं ने कंधों पर तिरंगे में लिपटा शरीर उठाया, और पूरे गांव में घुमाया। हर मोड़ पर लोग फूल बरसाते रहे, “अंकित अमर रहें” के नारे गूंजते रहे, लेकिन ये गूंज उस खामोशी से हार जाती रही, जो एक मां की सूनी मांग में थी, एक पत्नी की सूनी आँखों में थी।

शहादत की कहानी

जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में मंगलवार रात आतंकियों की घुसपैठ को रोकते हुए अंकित यादव शहीद हो गए। पाकिस्तानी सेना की बैट टीम ने बॉर्डर पर हमला किया, जिसे भारतीय जवानों ने मुंहतोड़ जवाब दिया। लेकिन इस जवाबी कार्रवाई में अंकित वीरगति को प्राप्त हो गए।13 अगस्त को शहीद हुए थे अंकित यादव।12 अगस्त की रात कश्मीर में अचानक आतंकियों की ओर से फायरिंग होने लगी। सेना ने भी जवाबी कार्रवाई की, इस दौरान आतंकियों की गोली अंकित को लग गई, जिसमें वे गंभीर रूप से घायल हो गए। जख्मी हालत में पहले AIP-06 और फिर देवी पोस्ट लाया गया। बटालियन के RMO (रेजिमेंटल मेडिकल ऑफिसर) ने ढाई घंटे तक उनका इलाज किया। इलाज के दौरान बुधवार सुबह 6:15 बजे दम तोड़ दिया।
सेना के अधिकारियों ने उनकी शहादत की सूचना बुधवार सुबह 10 बजे बड़े भाई निरंजन यादव को दी। जवान के घर में बूढ़ी मां सविता देवी और पिता लक्ष्मी यादव हैं। उनकी शहादत की खबर जब गांव पहुंची, तो सन्नाटा गूंजने लगा। लोग टूटे, लेकिन गर्व से भरे। गांव के बुजुर्गों ने कहा, “हमने पहली बार अपने गांव के बेटे को तिरंगे में लिपटे देखा, ये दुःख भी है, और गौरव भी।”

अंकित की जीवन गाथा

अंकित यादव 2009 में बिहार रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। सेना उनके खून में थी — उनके तीनों भाई भी भारतीय सेना में सेवाएं दे चुके हैं। एक महीना पहले ही वे छुट्टी पर घर आए थे। उन्होंने अपने गांव की गलियों में अपने बेटों को खेलते देखा था, पत्नी संग खेतों की हरियाली को निहारा था… किसे पता था कि ये उनका आखिरी मिलन होगा।शहीद की पत्नी की जीफ लाल जोड़े में लगाना है

शहीद अंकित भागलपुर के नवगछिया के चापर गांव के रहने वाले थे। शहीद जवान के बड़े भाई निरंजन यादव ने बताया, ‘अंकित 2009 में सेना में भर्ती हुए थे। बचपन से ही उनका सपना था कि वे सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करें। भाई के शहीद होने पर दुख तो है, लेकिन यह हमारे परिवार और जिले के लिए गर्व की बात है।’ भाई ने कहा, ‘छोटे भाई की शहादत पर मुझे गर्व है। एक माह पहले अंकित छुट्टी पर घर आए थे और 15 दिन पहले ही ड्यूटी पर लौटे थे। एक महीने पहले मेरठ से ट्रांसफर होकर कश्मीर गए थे।
अंकित 4 भाइयों में सबसे छोटे थे। पिता लक्ष्मी यादव किसान हैं। माता सविता देवी गृहिणी हैं। सबसे बड़े भाई निरंजन सेना में JCO के पद से रिटायर हुए हैं। फिलहाल झारखंड के सैप में नियुक्त हैं। निरंजन ने बताया कि वह घर के लिए रवाना हो चुके हैं। मंझले भाई मिथिलेश यादव RPF में एसआई हैं और पटना के बख्तियारपुर में तैनात हैं। तीसरे भाई मुकेश यादव आर्मी से रिटायर्ड हैं। रिटायर होने के बाद मुकेश यादव पूर्णिया में शिक्षक की नौकरी कर रहे हैं।

2017 में हुई थी शहीद अंकित की शादी

शहीद अंकित यादव की शादी वर्ष 2017 में कटिहार जिले के काढ़ा गोला की रहने वाली रूबी कुमारी से हुई थी। उनके दो बेटे हैं- उत्कर्ष (4) और उपांश (2)। पत्नी बच्चों के साथ कटिहार में रहती हैं। उनकी चार दिन पहले उन्होंने अपने वार्ड सदस्य को फोन कर पत्नी का वोटर कार्ड बनाने की बात की थी। शायद उन्हें अंदेशा नहीं था कि वो खुद इस लोकतंत्र की सबसे बड़ी कीमत चुका देंगे—अपनी जान।

सरकार और प्रशासन की उपस्थिति

सहकारिता मंत्री सह जिला प्रभारी, भागलपुर संतोष कुमार सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे खुद मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों के साथ वे भी इस आखिरी विदाई के साक्षी बने। उन्होंने कहा, “अंकित यादव ने जो बलिदान दिया है, वह केवल उनके परिवार का नहीं, पूरे देश का है। उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।”

इस गांव ने आज सिर्फ एक बेटा नहीं खोया, भारत मां ने अपनी गोद का एक लाल खो दिया।
घुटने भर पानी में भले ही अंतिम संस्कार हुआ हो,
लेकिन शहीद अंकित यादव की शहादत की ऊंचाई आसमान से भी ऊपर है।

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