नम आंखों से निशा भगत को अंतिम विदाई,पूर्व सीएम रघुवर दास,बाबूलाल मरांडी सहित कई बीजेपी के नेता हुए शामिल
खूंटी: गुमला के चैनपुर में शनिवार को आदिवासी नेत्री निशा भगत को अंतिम विदाई दी गई। इससे पहले अंतिम यात्रा में भारी जनसैलाब उमड़ पड़ा। गुमला शहर के डीएसपी रोड स्थित निवास से शुरू होकर यह अंतिम यात्रा चैनपुर प्रखंड के पैतृक गांव ऊरू बारडीह पहुंची, जहां उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, गीता कोड़ा, गुमला विधायक भूषण तिर्की और खूंटी विधायक समेत सैकड़ों लोगों ने नम आंखों से विदाई दी। इससे पहले सैकड़ों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग सड़कों पर उतरे और विरोध जुलूस निकालकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने डीएसपी रोड स्थित आवास पर पहुंचकर निशा भगत को श्रद्धासुमन अर्पित किए। उन्होंने निशा के पिता हंदू भगत से वार्ता कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। परिजनों से मुलाकात के बाद उन्होंने इस मामले के पीछे किसी बड़ी गहरी साजिश की आशंका जताई और पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग रखी। उन्होंने जोर देकर कहा कि निशा की मौत के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए ताकि सच सामने आ सके और दोषियों को सजा मिल सके।
पूर्व मुख्यमंत्री ने निशा भगत के सोशल मीडिया लाइव वीडियो का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने वीडियो में पिठोरिया थाना प्रभारी और अजय तिर्की समेत जिन लोगों का नाम लिया था, पुलिस को उन सभी की भूमिका की गहन जांच करनी चाहिए। उन्होंने संबंधित व्यक्तियों की तत्काल गिरफ्तारी की पुरजोर मांग की। उन्होंने अजय तिर्की के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि निशा को चूना पोतकर और सिर मुंडवाकर घुमाने जैसी गंभीर धमकियां दी जा रही थीं। उन्होंने यह आशंका भी व्यक्त की कि निशा को आत्महत्या के लिए मजबूर किए जाने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता।
बाबूलाल मरांडी के अनुसार, निशा भगत धर्मांतरण, भू-माफिया और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर निर्भीकता से आवाज उठा रही थीं। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए उनकी इस सक्रियता से कई लोग असहज थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी कभी निशा से व्यक्तिगत मुलाकात या फोन पर बातचीत नहीं हुई थी, लेकिन वे सोशल मीडिया के माध्यम से उनकी आवाज सुनते थे। निशा सरना और सनातन को एक मानती थीं, लेकिन उन्हें भाजपा तथा आरएसएस से जोड़कर प्रायोजित बताने का प्रयास किया जाता था। उन्होंने राज्य सरकार पर जमीन माफिया को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पीड़ितों की सुनवाई नहीं हो रही है तथा आवाज उठाने वालों को प्रताड़ित किया जा रहा है। इस मामले में पिता की शिकायत पर पिठोरिया थाने में मामला दर्ज किया गया है और परिवार व समाज निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की मांग कर रहा है।



