पिता के सपनों को पंख, मां की दुआओं से आसमान तक पहुंची घोघा की ‘लाडो’! 20 साल की वंशिका बनीं इंडिगो इंटरनेशनल क्रू कैप्टन

भागलपुर: किसी पिता के लिए इससे बड़ी खुशी क्या होगी कि जिस सपने को उसने अपनी आंखों में सजाया हो, उसे उसकी बेटी अपनी मेहनत और हौसले से हकीकत में बदल दे! किसी मां के लिए इससे बड़ा गर्व क्या होगा कि उसकी लाडो एक दिन अपनी कामयाबी से पूरे परिवार का सिर गर्व से ऊंचा कर दे! भागलपुर के घोघा स्थित गोपालपुर गांव की वंशिका विराज ने कुछ ऐसी ही सफलता की इबारत लिखी है। इस उपलब्धी पर भागलपुर की डीएम अलंकृता पांडे ने वंशिका को बधाई दी है।

महज 20 वर्ष की उम्र में वंशिका ने अपने हौसलों को ऐसी उड़ान दी है कि अब उनकी पहचान अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में बन गई है। इंडिगो की ओर से उन्हें इंटरनेशनल एयर क्रू कैप्टन के रूप में चयनित किया गया है। दो नवंबर 2026 को कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद दिल्ली मुख्यालय में उनकी पोस्टिंग हुई है। खास बात यह है कि देशभर से चयनित दस अभ्यर्थियों में बिहार और झारखंड से वंशिका अकेली चयनित अभ्यर्थी हैं।पिता विश्वजीत सिंह चाहते थे कि उनकी बेटी विमानन क्षेत्र में अपना करियर बनाए और क्रू कैप्टन बने। बेटी ने पिता की इस इच्छा को अपना लक्ष्य बना लिया। मां स्नेहा ने बचपन से ही बेटी को मानसिक रूप से मजबूत बनाया। हर परिस्थिति में आगे बढ़ने का हौसला दिया। माता-पिता दोनों के सहयोग और वंशिका की अथक मेहनत ने इस सपने को हकीकत में बदल दिया।

अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए वंशिका कहती हैं, ‘मैंने कभी हिम्मत नहीं हारी। मेरा प्रयास लगातार जारी रहा। हिम्मत, लगन और निरंतर प्रयास से किसी भी मंजिल को हासिल किया जा सकता है। इस मुकाम तक पहुंचने में मां ने बचपन से ही मुझे मानसिक रूप से तैयार किया। पिता भी हमेशा मेरा साथ देते रहे। मेरी सफलता में माता-पिता दोनों का अहम योगदान है। मेरी भी इच्छा थी कि मां-पिताजी के सपनों को पूरा कर सकूं। आज मैं बेहद खुश हूं।’

वंशिका को प्रशिक्षण के दौरान केरल में काफी अनुभव प्राप्त हुआ। अब कंपनी के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मिली जानकारी के अनुसार, उन्हें निर्धारित अवधि के लिए फिलीपींस में विशेष प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा। इस प्रशिक्षण के बाद अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र में उनकी जिम्मेदारियों का दायरा और बढ़ेगा।

वंशिका दो भाई-बहनों में बड़ी हैं। उनके पिता विश्वजीत सिंह निजी स्कूल में शिक्षक रहे हैं और बालाजी जेवियर स्कूल के पूर्व निदेशक भी रह चुके हैं। इसके अलावा वे अन्य व्यवसायों से भी जुड़े हैं। मां स्नेहा ने बेटी की परवरिश और उसके आत्मविश्वास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

घोघा की इस लाडो ने साबित कर दिया कि उड़ान भरने के लिए सिर्फ पंख नहीं, बल्कि मजबूत हौसले और परिवार का साथ भी जरूरी होता है। आज वंशिका ने अपने माता-पिता का सपना पूरा किया है, कल उनकी यह कामयाबी न जाने कितनी बेटियों को अपने सपनों की उड़ान भरने का साहस देगी।

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