चयन के बाद भी जॉइनिंग नहीं, मुरहू के कई आंगनबाड़ी केंद्र बंद,उप प्रमुख अरुण साबू ने जिला परिषद की बैठक में उठाया मामला, जल्द समाधान की मांग

खूंटी: मुरहू प्रखंड के विभिन्न आंगनबाड़ी केंद्रों में सेविका एवं सहायिका के चयन की प्रक्रिया पूरी होने और सत्यापन के बाद भी चयनित सेविका-सहायिका को अब तक योगदान नहीं कराया जा रहा है। इसके कारण कई आंगनबाड़ी केंद्र लंबे समय से प्रभावित हैं और बच्चों को नियमित रूप से आंगनबाड़ी की सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
मुरहू प्रखंड के बहमनी, कुददा, सिद्धू, राजकुंजला, ओसकोया, गुटिगड्डा, दुदरी सहित अन्य आंगनबाड़ी केंद्रों में नियमानुसार आमसभा के माध्यम से सेविका एवं सहायिका का चयन किया गया। चयन प्रक्रिया के बाद आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी की गई। इसके बावजूद चयनित अभ्यर्थियों को योगदान करने की अनुमति नहीं मिल रही है।
बताया गया कि आंगनबाड़ी कार्यालय द्वारा अब ऑनलाइन आवासीय प्रमाण पत्र जमा करने की बात कही जा रही है। वहीं, नए नियम के तहत ऑनलाइन आवासीय प्रमाण पत्र बनाने में अंचल कार्यालय को तकनीकी/नियमगत समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस कारण चयनित सेविका-सहायिका की जॉइनिंग की प्रक्रिया अटक गई है।
इस गंभीर समस्या को मुरहू प्रखंड के उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने जिला परिषद, खूंटी की बैठक में प्रश्नकाल के दौरान प्रमुखता से उठाया। मामले पर जिला सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि नियम में आवश्यक सुधार कर जल्द ही चयनित सेविका-सहायिका को योगदान कराने की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
इधर, चयनित सेविका-सहायिकाओं में भी असमंजस और चिंता की स्थिति बनी हुई है। उनका कहना है कि विभागीय स्तर पर उनसे कार्य लिया जा रहा है, जबकि उन्हें औपचारिक रूप से योगदान नहीं कराया गया है। कई चयनित सेविका-सहायिका बीएलओ का कार्य भी कर रही हैं। बच्चों की पढ़ाई और आंगनबाड़ी केंद्र की व्यवस्था प्रभावित न हो, इसके लिए वे अपनी जिम्मेदारी निभा रही हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी जॉइनिंग नहीं कराना विभागीय लापरवाही का विषय है।
उप प्रमुख अरुण कुमार साबू ने कहा कि लगभग पांच महीने से चयनित सेविका-सहायिका कार्य कर रही हैं, ऐसे में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उनके द्वारा किए जा रहे कार्य का मानदेय अथवा वेतन कौन और किस प्रक्रिया के तहत देगा। चयनित अभ्यर्थियों को काम लेने के बावजूद योगदान नहीं कराना उनके साथ अन्याय है।
उप प्रमुख ने प्रखंड विकास पदाधिकारी, मुरहू से मामले का शीघ्र समाधान कराने का आग्रह किया है। साथ ही उन्होंने जिला उपायुक्त, खूंटी से भी हस्तक्षेप कर इस समस्या का जल्द से जल्द निदान कराने की मांग की है, ताकि रुकी हुई चयन प्रक्रिया पूरी हो सके और बंद/प्रभावित आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सुचारू रूप से शुरू हो।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्रों का सीधा संबंध छोटे बच्चों के पोषण, शिक्षा और प्रारंभिक विकास से है। इसलिए प्रशासन को तकनीकी या नियमगत त्रुटि के कारण बच्चों और चयनित सेविका-सहायिकाओं को परेशानी में नहीं छोड़ना चाहिए। मामले का जल्द समाधान कर चयनित सेविका-सहायिकाओं को विधिवत योगदान कराया जाना चाहिए।

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