पत्राचार के पेंच में ध्वस्त हो गया विक्रमशिला सेतु
प्रदीप विद्रोही,भागलपुर।भागलपुर में विक्रमशिला सेतु 30 सितंबर की रात से बंद होने जा रहा है। एक अक्टूबर से पुल पर स्थायी मरम्मत का काम शुरू होगा। इसके लिए 30 सितंबर की मध्यरात्रि से वाहनों की आवाजाही पूरी तरह बंद कर दी जाएगी।सांसद अजय कुमार मंडल ने भी चीख – चीख कर इस गोलमाल की परत को खोलता रहा लेकिन किसी ने नहीं सुनी।जवाबदेही से कतराते दो मंत्रियों ने इस घटना को प्राकृतिक आपदा करार दिया।
करीब 99 करोड़ रुपये की लागत से होने वाले इस काम में अस्थायी बेली ब्रिज हटाया जाएगा और स्थायी स्टील स्ट्रक्चर लगाया जाएगा। साथ ही नए स्लैब, पुराने बियरिंग और एक्सपेंशन ज्वाइंट्स भी बदले जाएंगे। मरम्मत का काम करीब तीन महीने चलने की उम्मीद है और 31 दिसंबर 2026 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
लगातार चार वर्षों तक पत्राचार-दर- पत्राचार और ध्वस्त हो गया गंगा नदी पर बना विक्रमशिला सेतु, बेली ब्रिज में लाखों रुपये खर्च, अब विक्रमशीला सेतु पुनर्निर्माण में करोड़ों खर्च की शुरुआत हो चुकी है। अब देखना यह है कि यह प्रयास और कितने दिनों तक सेतु के सेहत की निगरानी कर सकता है। ऐसे कई प्रश्न चर्चा में है। जनमानस की यह राय है कि इन चर्चाओं के बाद भी अगर सेतु का लाइफ बढ़ जाए तो गनीमत है। विक्रमशिला सेतु 3 मई 2026 की रात को टूटा था।
प्राप्त जानकारी के अनुसार विक्रमशिला सेतु के पुनर्निर्माण और स्थायी मरम्मत कार्य पर लगभग ₹99 करोड़ (विस्तृत परियोजना एवं कैबिनेट के कुल स्वीकृत पैकेज के अनुसार लगभग ₹126.26 करोड़) खर्च किए जा रहे हैं। यानी स्पष्ट है कि महज माह भर की सुविधा के लिए बेली ब्रिज के निर्माण में करीब साढ़े 26 लाख रुपये गंगा में बहा दिया गया।बेली ब्रिज 7 जून 2026 को पूरी तरह तैयार होकर छोटे वाहनों के परिचालन के लिए उद्घाटन कर दिया गया था। बिहपुर विधानसभा क्षेत्र से महागठबंधन की प्रत्याशी अर्पणा विस्तार से उपर्युक्त फिजूल खर्च को प्रस्तुत करते हुए दावे के साथ कहती है कि यह लूट नहीं तो और क्या है।
विक्रमशिला सेतु के नवगछिया छोर पर गंगा की धारा के उत्तर की ओर खिसकने के बावजूद सेतु के पहुंच पथ की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित 910 मीटर लंबे और 22 मीटर चौड़े गाइड बंड का मामला वर्षों से पत्राचार में अटका रहा। इसी बीच विक्रमशिला सेतु के ध्वस्त होने को लेकर सुरक्षा इंतजामों पर सवाल खड़े किए गए। अब बेली ब्रिज का निर्माण पश्चात उसे हटाकर सेतु का पुनर्निर्माण जैसे करोड़ों के खेल देखना बाकी ह। बेली ब्रिज के निर्माण में करोड़ों स्वाहा आखिर क्यों! और अब बेली ब्रिज को हटाकर सेतु के मरम्मत यानी पुनर्निर्माण में करोड़ों का खेल।
मालूम हो कि 6 फरवरी 2023 की WRD और MoRTH की तकनीकी निरीक्षण रिपोर्ट में गंगा के उत्तर की ओर खिसकने और नवगछिया तरफ नदी प्रशिक्षण व सुरक्षा कार्य की जरूरत दर्ज की गई थी। रिपोर्ट में पुल पूरा होने से पहले River Training/Protection Work पूरा करने की बात भी कही गई थी।
इसके बाद 7 नवंबर 2025 को रेलवे और राष्ट्रीय उच्च पथ विभाग ने संयुक्त निरीक्षण किया। मौके पर पुरानी अनुपयोगी Narrow Gauge रेल लाइन का embankment मिला, जिस पर Guide Bund बनाने का प्रस्ताव है। NH विभाग ने 18 नवंबर 2025 को रेलवे से जमीन हस्तांतरण की कार्रवाई मांगी। रेलवे ने 9 जनवरी 2026 को MoRTH की सहमति/स्वीकृति रिपोर्ट मांगी, जिसे NH विभाग ने 14 जनवरी को उपलब्ध कराया। फिर भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी। 8 सितंबर 2026 को रेलवे ने IR-LSPS पोर्टल पर आवेदन, लाइसेंस शुल्क और सक्षम अधिकारी की स्वीकृति के बाद ही NOC देने की बात कही। इसके बाद NH विभाग ने 16 सितंबर 2026 को फिर जमीन हस्तांतरण शीघ्र करने का अनुरोध किया।
NH विभाग के अनुसार यह गाइड बंड NH-131B के 4-लेनिंग और नए विक्रमशिला सेतु के पहुंच पथ की सुरक्षा के लिए जरूरी है। सवाल है कि 2023 में दर्ज नदी के बदलते रुख की चेतावनी के बाद भी जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया अब तक क्यों अटकी रही। इस पेंच के बाद विक्रमशिला सेतु का क्या हश्र हुआ यह किसी से छिपा हुआ नहीं है।
((((( बॉक्स ख़बर )))))
फाइल में दर्ज तारीखें खोलती हैं पूरा मामला:
06.02.2023 – WRD और MoRTH के अधिकारियों का विक्रमशिला सेतु स्थल निरीक्षण।07.11.2025 – रेलवे एवं NH विभाग का संयुक्त स्थल निरीक्षण। 18.11.2025 – NH विभाग ने रेलवे से जमीन हस्तांतरण की कार्रवाई मांगी। 09.01.2026 – रेलवे ने MoRTH की सहमति/स्वीकृति रिपोर्ट मांगी।14.01.2026 – NH विभाग ने संबंधित सहमति दस्तावेज रेलवे को भेजे।08.09.2026 – रेलवे ने IR-LSPS पोर्टल के जरिए आवेदन और निर्धारित प्रक्रिया की बात कही।16.09.2026 – NH विभाग ने फिर जमीन हस्तांतरण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने का अनुरोध किया।


