सरना कोड की मांग सहित अन्य मांगों को लेकर झामुमो का 9 अप्रैल को विरोध प्रदर्शन स्थगित

रांची। सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने सरना आदिवासी धर्मकोड को जनगणना कॉलम में शामिल कराने की मांग को लेकर 9 मई को प्रस्तावित राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन को स्थगित कर दिया है। झामुमो के महासचिव सह प्रवक्ता विनोद कुमार पांडेय ने गुरुवार को कैंप कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता के माध्यम से बताया कि देश की सीमाओं पर उत्पन्न स्थिति को देखते हुए पार्टी ने यह निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि वीर भूमि झारखंड अपनी पूरी ताकत के साथ देश के बहादुर जवानों के साथ खड़ा है। सीमा पार से संचालित आतंकवाद को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
इससे पहले, झामुमो ने ऐलान किया था कि जब तक सरना आदिवासी धर्मकोड को लागू नहीं किया जाएगा, तब तक झारखंड में जनगणना की इजाजत नहीं दी जाएगी। झारखंड विधानसभा ने 11 नवंबर 2020 को एक विशेष सत्र में सर्वसम्मति से ‘सरना आदिवासी धर्म कोड’ का प्रस्ताव पारित किया था।
सरना धर्म कोड के प्रस्ताव का उद्देश्य 2021 की जनगणना में सरना और आदिवासी धर्म को मानने वालों को एक अलग धार्मिक पहचान दिलाना है। सरना धर्म के अनुयायी प्रकृति पूजक होते हैं और वे स्वयं को हिंदू धर्म का हिस्सा नहीं मानते। प्रस्ताव पारित होने के बाद इसे केंद्र सरकार को भेजा गया था, लेकिन केंद्र की ओर से अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
पार्टी के सभी जिला अध्यक्षों, सचिवों और केंद्रीय समिति के पदाधिकारियों को राज्यव्यापी आंदोलन को लेकर दिया गया निर्देश वापस ले लिया गया है।

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