सोमा मुंडा हत्याकांड के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी की मांग को ले 17को झारखंड बंद,आदिवासी संगठनों ने निकाला मशाल जुलूस
रांची: आदिवासी समाज एवं विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों की ओर से झारखंड के आदिवासी समाज के निडर नेता, पड़हा राजा एवं अबुआ झारखंड पार्टी के प्रमुख कार्यकर्ता स्वर्गीय सोमा मुंडा की क्रूर हत्या के विरोध में आज राजधानी रांची में भव्य मशाल जुलूस निकाला गया तथा 17 जनवरी को पूरे राज्य में ‘झारखंड बंद’ का आह्वान किया गया है।
आदिवासी संगठनों ने कहा कि पिछले 7 जनवरी को खूंटी जिले में सोमा मुंडा जी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह हत्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि जमीन-जंगल-जल के रक्षक के रूप में उनकी संघर्षपूर्ण आवाज को दबाने की सुनियोजित साजिश थी। 3.16 एकड़ विवादित भूमि पर पारंपरिक पदहा जत्रा मेला आयोजित होने के कारण स्थानीय आदिवासियों ने भूमि बिक्री का विरोध किया था। नवंबर में भूमि समतल करने एवं सीमा चिन्ह हटाने के बाद साजिश रची गई, जिसके परिणामस्वरूप सोमा मुंडा की हत्या हुई। पुलिस ने सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, किंतु मुख्य साजिशकर्ता, शूटर एवं भूमि माफिया अभी फरार हैं। हत्याकांड का पूर्ण खुलासा नहीं हुआ है, जो आदिवासी समाज के लिए गंभीर चुनौती है।
सोमा मुंडा जी 56 गांवों के पारंपरिक ‘एदेल संगा पड़हा राजा’ थे, जिन्होंने जमीन-जंगल-जल की रक्षा के लिए जीवन समर्पित किया। ऐसी हत्याओं का सिलसिला झारखंड अलग राज्य बनने के बाद से लगातार होते आ रहा है। सरकार किसी की भी इस पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा है। आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ताओं की ये हत्यायें आदिवासी अधिकारों, परंपराओं और लोकतंत्र पर हमला है।
आज जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकले मशाल जुलूस में सैकड़ों आदिवासी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं जनता शामिल हुए। यह जुलूस विरोध मात्र नहीं, बल्कि सोमा मुंडा जी के संघर्ष को आगे बढ़ाने एवं आदिवासी एकता की मिसाल है। यह हमारी जमीन, पहचान एवं भविष्य की लड़ाई है।
आयोजक सभी राजनीतिक दलों, वामपंथी संगठनों, आदिवासी मूलवासी समूहों एवं आम जनता से अपील करते हैं कि कल के झारखंड बंद को पूर्ण सफल बनाएं।
इस मशाल जुलूस कार्यक्रम में मुख्य रुप से प्रेम शाही मुंडा गीताश्री उरांव देव कुमार धान, लक्ष्मीनारायण मुंडा , आकाश तिर्की, संगीता तिर्की बलकु उरांव एस अली कीर्ति सिंह मुंडा ,बबलू मुंडा,आकाश तिर्की प्रीतम लोहरा डब्लू मुंडा, फूलचदतिर्की, एंजेल लकड़ा, रवि पीटर,जगदीश पाहन अभयभुट कुंवर रमेश उरांव शिवशंकर नीलकंठ शामिल थे।
इसमें विभिन्न आदिवासी मूलवासी संगठनों ने सक्रिय समर्थन दिया है।
इस बंदी में मेडिकल सेवा को मुक्त रखा गया है।



