भागलपुर: जलवायु परिवर्तन से निपटने को जीविका दीदियों ने संभाली कमान
भागलपुर। जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरे से निपटने की दिशा में बिहार में ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान के अंतर्गत बड़ी पहल की जा रही है। इस मुहिम में अब जीविका दीदियाँ भी कंधे से कंधा मिलाकर राज्य को हरित बनाने का संकल्प निभा रही हैं।
भागलपुर जिले में इस वर्ष 2 लाख 54 हजार से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। इस कार्य में जिले की 28,554 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 3 लाख 39 हजार से अधिक जीविका दीदियाँ शामिल हैं, जिन्होंने कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लिया है।
राज्य में वर्ष 2019 से माननीय मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा शुरू किए गए ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान’ के तहत हर वर्ष व्यापक स्तर पर पौधारोपण किया जाता है। इस अभियान के तहत पर्यावरण संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और हरित आवरण बढ़ाने की दिशा में सतत कार्य किया जा रहा है।
इस अभियान की सफलता के लिए पौधों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु “दीदी की नर्सरी” एक अहम भूमिका निभा रही है। वर्तमान में भागलपुर में 23 दीदी की नर्सरी कार्यरत हैं, जिनमें से 16 का संचालन मनरेगा के तहत और 9 का संचालन पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सहायता से हो रहा है। इन नर्सरियों में प्रशिक्षित जीविका दीदियाँ शिशु पौधों का उत्पादन कर रहीं हैं, जिससे समय पर और गुणवत्ता युक्त पौधों की आपूर्ति संभव हो पा रही है।
पिछले वर्ष भी दीदियों ने 2 लाख से अधिक पौधे लगाए थे। इस बार भी जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए पीपल, नीम जैसे औषधीय पेड़, आम, अमरूद, नारियल जैसे फलदार वृक्ष, कटहल, सहजन जैसी उपयोगी सब्जियों के पौधे तथा सागवान, महोगनी जैसे इमारती लकड़ियों के पौधों का चयन किया गया है।
इन प्रयासों से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बल मिल रहा है, बल्कि दीदियों के परिवारों को पोषण एवं आजीविका का नया आधार भी प्राप्त हो रहा है। इस अभियान ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि जनसहभागिता हो, तो जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौती से भी सफलतापूर्वक निपटा जा सकता है।



