रेत की लहरों पर रचा सम्मान का इतिहास, मधुरेंद्र को मिला डॉ. अंबेडकर राष्ट्रीय सम्मान 2025

प्रदीप विद्रोही
भागलपुर। रेत के कणों में राष्ट्र, संस्कृति और समाज की तस्वीर उकेरने वाले अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त रेत कलाकार मधुरेंद्र कुमार के नाम एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ गई है। भारतीय कला और सांस्कृतिक चेतना को वैश्विक पहचान दिलाने वाले मधुरेंद्र को वर्ष 2025 का डॉ. भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया गया है।
यह प्रतिष्ठित सम्मान ग्लोबल आईकॉन ऑफ इंडिया ई-मैगजीन की ओर से प्रमाण पत्र संख्या GII/DRBARS/2025/92 के तहत दिया गया। संस्था ने ईमेल के माध्यम से औपचारिक सूचना और शुभकामनाएं भेजीं, वहीं डाक द्वारा प्रशस्ति पत्र, सम्मान मेडल और स्मृति चिन्ह प्रेषित कर उन्हें विधिवत सम्मानित किया।
रेत को माध्यम बनाकर संदेश देने की उनकी कला ने मधुरेंद्र को देश-विदेश में विशिष्ट पहचान दिलाई है। स्वच्छता अभियान, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक जागरूकता और महान विभूतियों को समर्पित उनकी हजारों रेत कलाकृतियां न केवल कला हैं, बल्कि समाज से संवाद भी हैं। उनकी रचनाओं ने भारत की सांस्कृतिक छवि को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मजबूती दी है।
हाल ही में 21 दिसंबर को नालंदा जिले में आयोजित तीन दिवसीय राजगीर महोत्सव के समापन अवसर पर भी उनकी कला को विशेष सम्मान मिला। बिहार सरकार के पर्यटन मंत्री अरुण शंकर प्रसाद, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार और नालंदा के जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने मुख्य मंच से मधुरेंद्र को सम्मानित करते हुए उनकी रचनात्मक प्रतिभा की सराहना की थी।
डॉ. भीमराव अंबेडकर राष्ट्रीय सम्मान, मधुरेंद्र कुमार की निरंतर साधना, सृजनशीलता और कला के प्रति अटूट समर्पण का प्रतीक है। इस उपलब्धि पर कला जगत, सामाजिक संगठनों और उनके प्रशंसकों में उत्साह है। सभी ने इसे बिहार ही नहीं, पूरे देश के लिए गौरव का क्षण बताया है।

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