गंगा फिर रौद्र रूप में, कहलगांव-भागलपुर में गंगा का जलस्तर फिर बढ़ा, प्रशासन अलर्ट मोड पर
भागलपुर।गुरुवार की सुबह जैसे ही सूरज निकला, गंगा के किनारे बसे गांवों में एक बेचैनी भी जागी। लोगों की निगाहें अब न तो आसमान पर हैं, न बारिश पर – सबकी निगाहें बस गंगा पर टिकी हैं। भागलपुर, कहलगांव और सुल्तानगंज में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, और इस बार खतरा एक बार फिर दरवाज़े तक आ पहुंचा है।
बक्सर से फरक्का तक अलर्ट
केंद्रीय जल आयोग की रिपोर्ट बताती है कि भागलपुर में गंगा का जलस्तर अब 32.80 मीटर पर है – खतरे के निशान से सिर्फ 88 सेमी नीचे। कहलगांव में तो स्थिति और गंभीर है। वहां गंगा 31.48 मीटर पर बह रही है, यानी खतरे के निशान से 39 सेंटीमीटर ऊपर।
फरक्का, मुंगेर, पटना, दीघा, हाथीदह – सभी जगह गंगा उफान पर है। जल संसाधन विभाग ने पूरे बक्सर से भागलपुर तक प्रशासन को सुदृढ़ तैयारियां रखने का निर्देश जारी कर दिया है। तटबंधों की निगरानी तेज़ कर दी गई है, और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट पर रखा गया है।
48 घंटे में पार कर सकती है खतरे की सीमा
आयोग की रिपोर्ट कहती है कि अगले 48 घंटे में गंगा भागलपुर में खतरे का निशान पार कर सकती है। यानी समय बहुत कम है। पिछले साल की बाढ़ की तबाही अभी लोगों के ज़ेहन से गई नहीं थी, और अब एक बार फिर वही डर लौट आया है।
निचले इलाकों में घुसा पानी, शहर की सड़कों तक गंगा का असर
शहर के बूढ़ानाथ घाट, टीएमबीयू क्षेत्र, किला घाट, बरारी पुल घाट – पानी अब सीढ़ियों से ऊपर चढ़ने लगा है। शंकरपुर, रततीपुर, बैरिया पंचायत की सड़कें फिर से जलमग्न होने लगी हैं।
नगर निगम के 13 वार्डों के प्रभावित होने की आशंका है। दियारा के लोग फिर से घर छोड़ने की सोचने लगे हैं। बच्चों के स्कूल बंद हो सकते हैं, राशन लाने के रास्ते बंद होने लगे हैं। शहर के भीतर भी बाढ़ की आहट अब सुनाई देने लगी है।
वोट नहीं देंगे! – ग्रामीणों का गुस्सा उफन पड़ा
सबौर प्रखंड के ममलखा और शंकरपुर पंचायतों में गुरुवार को सैकड़ों ग्रामीण सड़क पर उतर आए। इनकी मांग है: बाबूपुर से शंकरपुर तक रिंग बांध का निर्माण हो, जिससे कटाव रोका जा सके। हर साल बाढ़ आती है, हर साल घर बहते हैं। नेता आते हैं, वादा करते हैं और चले जाते हैं। इस बार अगर रिंग बांध नहीं बना, तो हम वोट नहीं देंगे, – ये शब्द हैं एक बुजुर्ग ग्रामीण के, जिनका घर पिछले साल की बाढ़ में बह गया था। गांववालों का साफ कहना है – ये केवल पानी की मार नहीं है, ये व्यवस्था की बेरुखी है। सिर्फ कोरा आश्वासन नहीं चाहिए, अब ठोस समाधान चाहिए।
कटाव रोधी कार्य तेज, लेकिन समय कम
नवगछिया के इस्माइलपुर-बिंद टोली समेत संवेदनशील क्षेत्रों में कटाव रोधी कार्य तो तेज कर दिए गए हैं, लेकिन यह रेस वक्त के साथ है। सवाल यह है कि क्या तैयारियां गंगा की रफ्तार से तेज़ हैं?
फिर वही डर, फिर वही इंतज़ार
भागलपुर एक बार फिर बाढ़ के मुहाने पर है। लोग फिर से इंतज़ार में हैं – कुछ के लिए राहत की नाव, तो कुछ के लिए प्रशासन की जवाबदेही। गंगा चुपचाप बह रही है – लेकिन उसकी खामोशी में भी एक चेतावनी छिपी है।



