झारखंड के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार देवघर के लिए हुए रवाना
भागलपुर। श्रावणी मेला एक ओर जहाँ आस्था, भक्ति और उत्साह का प्रतीक है, वहीं इसमें शामिल होने वाले श्रद्धालुओं की कहानियां भी उतनी ही प्रेरणादायक होती हैं। ऐसी ही एक मिसाल पेश की है झारखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार ने, जिन्होंने रविवार को भागलपुर के सुल्तानगंज स्थित गंगा घाट से पवित्र जल उठाया और कच्ची कांवरिया पथ से होकर पैदल बैद्यनाथ धाम, देवघर के लिए रवाना हो गए। वे पीठीया जल लेकर चल रहे हैं। उनके साथ एक सुरक्षाकर्मी भी पैदल चल रहे हैं।
राजीव कुमार ने बताया कि उनकी यह यात्रा कोई नई पहल नहीं है, बल्कि वर्ष 2015 से ही वे हर साल श्रावणी माह में बाबा धाम की पैदल यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, महादेव के प्रति मेरी आस्था गहरी और अडिग है। यह यात्रा मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है।
उन्होंने बताया कि जब वे झारखंड के डीजीपी पद पर कार्यरत थे, तब भी उन्होंने पहली बार वर्ष 2015 में कांवर यात्रा की थी। इसके बाद 2016 में सेवा निवृत्त होने के बाद से अब तक हर साल यह यात्रा कर रहे हैं। कोविड में यात्रा नहीं कर पाया। यह केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मिक शांति और आत्मसाक्षात्कार का अनुभव है, उन्होंने कहा।
बिहार सरकार की व्यवस्थाओं की की सराहना :
पूर्व डीजीपी राजीव कुमार ने बिहार सरकार और जिला प्रशासन द्वारा कांवरियों के लिए की गई व्यवस्थाओं की भी जमकर प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि “श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने इस बार हर स्तर पर उत्कृष्ट इंतजाम किए हैं। सुरक्षा, स्वच्छता, चिकित्सा सहायता और मार्ग संचालन — सभी कुछ व्यवस्थित और प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है।”
उन्होंने कहा कि मार्ग में जगह-जगह लगाए गए मेडिकल कैंप, ठहराव स्थल और सुरक्षा बलों की तैनाती से श्रद्धालु खुद को सुरक्षित और संरक्षित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से कांवर पथ की सफाई और निगरानी व्यवस्था को सराहा।
आस्था का संदेश लेकर निकले पूर्व शीर्ष अधिकारी :
एक ओर जहाँ आमजन कांवर लेकर शिव की भक्ति में लीन हैं, वहीं पूर्व डीजीपी जैसे वरिष्ठ पद पर रहे अधिकारी का इस यात्रा में सम्मिलित होना आम लोगों के लिए भी प्रेरणास्पद है। प्रशासनिक सेवा से जुड़े व्यक्ति का आस्था और विनम्रता के साथ कांवर यात्रा करना समाज को यह संदेश देता है कि धर्म, आस्था और सेवा के भाव से बड़ा कोई पद नहीं होता।



