लोकतंत्र की रक्षा में सीआईएसएफ का अद्भुत समर्पण – सेवा, सतर्कता और संकल्प की मिसाल
भागलपुर। बिहार के 18 जिलों में संपन्न हुए प्रथम चरण के मतदान में जहाँ मतदाताओं ने अपने लोकतांत्रिक अधिकार का उपयोग किया, वहीं मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता और शांति सुनिश्चित करने में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवानों ने अनुकरणीय भूमिका निभाई। पूरे राज्य में तैनात सीआईएसएफ की 190 कंपनियों ने जिस पेशेवर दक्षता, अनुशासन और समर्पण का परिचय दिया, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह बल केवल सुरक्षा का पर्याय नहीं, बल्कि राष्ट्र की लोकतांत्रिक भावना का सच्चा प्रहरी है।
मतदान के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए जवानों की सजगता और त्वरित प्रतिक्रिया ने माहौल को शांतिपूर्ण बनाए रखा। बूथों के भीतर और बाहर तैनात जवानों ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखा, बल्कि मतदाताओं के साथ सौहार्दपूर्ण व्यवहार कर यह भी दिखाया कि सख्ती और संवेदनशीलता साथ-साथ चल सकती हैं।
सीआईएसएफ का आदर्श वाक्य “Protection and Security” (संरक्षण और सुरक्षा) इस चुनावी ड्यूटी के दौरान हर कदम पर जीवंत होता दिखा। लोकतंत्र की इस परीक्षा में बल के कर्मियों ने न केवल कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया, बल्कि सेवा और संयम का ऐसा उदाहरण प्रस्तुत किया, जो आने वाले समय में अन्य बलों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बल का हर जवान अपने मिशन को केवल ड्यूटी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा मानता है। कठिन परिस्थितियों, लगातार ड्यूटी और भारी भीड़ के बीच भी उनके चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का आत्मविश्वास झलकता रहा।
इस पूरे अभियान ने यह स्पष्ट कर दिया कि सीआईएसएफ सिर्फ औद्योगिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा तक सीमित नहीं, बल्कि लोकतंत्र के इस महायज्ञ में भी उसकी भूमिका उतनी ही महत्वपूर्ण है।
इन जवानों की समर्पित सेवा ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि जब देश की सुरक्षा और लोकतांत्रिक मर्यादा की रक्षा की बात आती है, तो सीआईएसएफ हर मोर्चे पर सबसे आगे खड़ी रहती है।



