पानी पर मंथन: जल-समृद्ध बिहार क्यों प्यासा!
भागलपुर। भागलपुर में विश्व जल दिवस और बिहार दिवस के मौके पर एक ऐसी संगोष्ठी हुई, जिसमें सवाल सिर्फ पानी का नहीं, बल्कि उसके सही इस्तेमाल और भविष्य का भी था। ‘जल समृद्ध बिहार की चुनौतियां और संभावनाएं’ विषय पर जनप्रिय भागलपुर और एक्शन एड एसोसिएशन (बिहार) ने मिलकर यह चर्चा आयोजित की। अध्यक्षता संजय कुमार ने की, जबकि संचालन गौतम कुमार ने संभाला।
मुख्य वक्ता डॉ. मनोज कुमार ने बिहार की पहचान को याद दिलाते हुए कहा कि गंगा-कोसी जैसी बारहमासी नदियों से भरपूर यह राज्य हमेशा जल-समृद्ध माना गया है। लेकिन विडंबना यह है कि आज वही बिहार जल प्रबंधन, संरक्षण और गुणवत्ता जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर नीतियों में आम लोगों की भागीदारी बढ़े, तो यही चुनौतियां अवसर बन सकती हैं।
मुख्य अतिथि डॉ. मनोज मीता ने बिहार की सांस्कृतिक समृद्धि का जिक्र करते हुए कहा कि परंपराओं से मजबूत यह राज्य जल संकट से अछूता नहीं रहा। उन्होंने साफ कहा कि इस समस्या का हल तभी निकलेगा जब सरकार, समाज और स्थानीय लोग मिलकर जिम्मेदारी निभाएं।
वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने ‘जल-जीवन-हरियाली योजना’ की सराहना तो की, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी कि तेजी से हो रहा भूजल दोहन भविष्य के लिए खतरे की घंटी है।
संगोष्ठी के अध्यक्ष संजय कुमार ने एक अहम विरोधाभास पर ध्यान दिलाया – हम जल भंडार के बीच रहते हैं, फिर भी कहीं बाढ़ तो कहीं सूखा है। उन्होंने विश्वास जताया कि अगर ठोस संकल्प के साथ जल प्रबंधन किया जाए, तो भागलपुर ही नहीं, पूरा बिहार दुनिया के लिए उदाहरण बन सकता है। उन्होंने जल्द ही भागलपुर में जल प्रबंधन पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा भी की।
कार्यक्रम में रेखा कुमारी, अविनाश कुमार, श्रवण कुमार, राजा कुमार सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। वहीं जूली देवी, रागनी, अभिलाषा, निहारिका, बाबूलाल पासवान, उर्मिला देवी और शाहिद समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।



