भाजपा विधायक दल की हुई बैठक,मानसून सत्र में साकार को सरकार घेरने पर बनी रणनीति
रांची: झारखंड विधानसभा मानसून सत्र के दौरान सदन में सरकार को राज्य की ज्वलंत मुद्दों पर घेरने को लेकर शुक्रवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रदेश अध्यक्ष एवम नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की अध्यक्षता में भाजपा विधायक दल की बैठक हुई। बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष डॉ रविंद्र कुमार राय,संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह ,पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन,विधायक एवं मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल,सचेतक नागेंद्र महतो,विधायक नीरा यादव , मनोज यादव,सत्येंद्र तिवारी,आलोक चौरसिया,देवेंद्र कुंवर,अमित यादव,रोशनलाल चौधरी,उज्जवल दास,प्रदीप प्रसाद,पूर्णिमा दास
साहू,मंजू कुमारी उपस्थित रहे।
बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पार्टी के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने कहा कि पार्टी के विधायक दल की बैठक में राज्य के ज्वलंत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार को विकास से कुछ भी लेना देना नहीं है। यह सरकार केवल नाम बदलने में विश्वास करती है। सत्ता मद में इतनी चूर है कि देश की एकता और अखंडता केलिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले महापुरुष डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी और राज्य के निर्माता भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी का नाम बदलकर उन्हें अपमानित कर रही। यह उन महा पुरुषों का अपमान नहीं बल्कि देश और राज्य का अपमान है।
श्री जायसवाल कहा कि राज्य सरकार मदर टेरेसा के नाम पर कोई अन्य योजना शुरू कर सकती थी लेकिन ये सरकार तुष्टीकरण में आकंठ डूबी है। इस सरकार की विकास यात्रा की कहानी मदरसा से टेरेसा तक जारी है।इस माध्यम से हेमंत सरकार गांव देहात में चंगाई सभा के साथ मदर टेरेसा क्लीनिक के माध्यम से धर्मांतरण को बढ़ावा देना चाहती है।
बैठक में इसके अलावा रिम्स 2 के बहाने यह सरकार किसानों पर कहर ढाना चाहती है। आज किसान अति वृष्टि से परेशान है।फसलें सब्जी बर्बाद हो रहे, भदाई फसलें बर्बाद हो चुकी है पर सरकार निश्चिंत बैठी है। सत्तापक्ष के द्वारा सदन में मतदाता पुनरीक्षण का विरोध के सवाल पर कहा कि यह सरकार बांग्लादेशी रोहिंग्या घुसपैठियों का संरक्षण करते रहना चाहती है। पिछड़ों को 27% आरक्षण देने की बात करने वाली सरकार में नीयत साफ है तो निकाय चुनाव में राज्य सरकार 27% आरक्षण सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा इसके अतिरिक्त राज्य की ध्वस्त विधि व्यवस्था ,महिलाओं के साथ बढ़ते अत्याचार भी सदन में मुद्दे बनेंगे।



