भागलपुर के दो सगे भाई रामस्वरूप व रामदेव सिंह बने ‘यूनिक फल’ उत्पादन की मिसाल

भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर और कहलगांव प्रखंड स्थित एकचारी भोलसर गांव में रहने वाले बुजुर्ग किसान सगे भाई रामस्वरूप सिंह व रामदेव सिंह आज कृषि क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। उम्र के इस पड़ाव पर भी उनका उत्साह और नवाचार के प्रति लगाव युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। पारंपरिक खेती से अलग हटकर वे यूनिक फल, फूल और पौधों के संग्रह व उत्पादन में विशेष रुचि रखते हैं।

रामस्वरूप सिंह (80 वर्ष) के बगीचे में काला अमरूद, काला केला जैसे दुर्लभ फलों के साथ-साथ उजला चंदन और रक्त चंदन जैसे बहुमूल्य पौधे भी लहलहा रहे हैं। हाल के वर्षों में उन्होंने ड्रैगन फ्रूट के पौधे भी लगाए हैं, जो उनकी आधुनिक और वैज्ञानिक सोच को दर्शाता है। उनका मानना है कि बदलते समय के साथ किसानों को नई किस्मों और तकनीकों को अपनाना चाहिए, तभी खेती लाभकारी बन सकती है।

कभी शिक्षा क्षेत्र में सिल्क सिटी को प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान दिलाने के लिए अवार्ड पा चुके रामस्वरूप के छोटे भाई भागलपुर स्थित मोहद्दीनगर के 75 वर्षीय रामदेव सिंह छत पर बागवानी का अनोखा मॉडल तैयार कर दिया. इतना ही नहीं लंबे समय से खेती करने वाले किसान व बागवां भी हैरत में है। अनोखा फल व सब्जियां छत पर ही उपजाते हैं।

मोहद्दीनगर में प्राचार्य रह चुके रामदेव सिंह ने बताया कि 800 स्क्वायर फीट के छत पर 50 प्रकार के फल व सब्जियों की बागवानी कर रहे हैं। अभी छत पर रोज एपल, तरह-तरह के अमरूद, अनार, तरह-तरह के बेर, जामुन, काला शरीफा, ड्रेगन फ्रूट, अश्वगंधा, शहतूत, ऑल स्पाइश प्लांट को उगाया है. इसके अलावा बैगन, धनिया, लहसून, अजवाइन, पत्ता गोभी, फूलगोभी, आकर्षक टमाटर आदि की भी खेती छत पर कर रहे हैं. एक-एक अमरूद 250 से 350 ग्राम के और बेल दो किलोग्राम वजन के हैं. मीठा बेर 100 ग्राम से अधिक वजन का है। रामदेव सिंह ने बताया कि छत के तीन तरफ तीन फीट चौड़ी और दो फीट ऊंची दीवार देकर कंपोष्ट व मिट्टी देकर बागवानी योग्य जमीन तैयार की।

शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों भाइयों रामस्वरूप व रामदेव का योगदान उल्लेखनीय रहा है। रामस्वरूप एक निजी कॉलेज में प्रिंसिपल के पद पर कार्य कर चुके हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपना अधिकांश समय कृषि नवाचार और दुर्लभ पौधों के संरक्षण में लगा दिया। खास तौर पर काला अमरूद के उत्पादन में उन्हें जिला स्तर पर कई बार पुरस्कार मिल चुके हैं, जो उनकी मेहनत और लगन का प्रमाण है। वहीं रामदेव सिंह ने प्राचार्य रहते हुए सिल्क सिटी में मोहद्दीनगर मध्य विद्यालय को टॉप बनाया था। इसके लिए शिक्षा विभाग के पदाधिकारी की ओर से पुरस्कृत किया गया था। पत्नी गीता कुमारी गृहिणी है, जिनके सपोर्ट से पुत्र व पुत्री भी बड़े ओहदे पर कार्यरत है। बड़ा पुत्र पहले बीएचयू आइआइटी के प्रोफेसर और अब बीआइटी मेसरा में प्रोफेसर हैं। आईआईटी रुड़की से किए अद्भुत शोध अमेरीका के लाइब्रेरी में उपलब्ध है। दूसरा पुत्र जेएनयू से एमफील और अब पीएचडी कर रहा है। एक पुत्री महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ से एमएफए और दूसरी भी बीएड में अपने बैच में टॉपर रही है।

बीएयू सबौर द्वारा करीब चार वर्ष पहले विकसित किए गए काले अमरूद की विशेष किस्म को लेकर रामस्वरूप सिंह कहते हैं इस अमरूद की खासियत यह है कि इसका छिलका काला और अंदर का गूदा लाल होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह अमरूद एंटीऑक्सीडेंट, खनिज और विटामिन से भरपूर होता है, जिससे स्वास्थ्य के लिहाज से इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है। रामस्वरूप सिंह व रामदेव सिंह का कहना है कि यदि किसान पारंपरिक फसलों के साथ-साथ यूनिक और उच्च मूल्य वाले फलों की खेती करें तो आय के नए स्रोत खुल सकते हैं। उनका बगीचा आज न सिर्फ कृषि प्रयोगशाला बन चुका है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए सीख और प्रेरणा का केंद्र भी है।

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