अमर हुतात्मा स्वामी श्रद्धानंद सरस्वती जी का 99वीं बलिदान दिवस मनाया गया

 पटना/आरा। भोजपुर के आर्य समाज मंदिर में स्वामी श्रद्धांनंद बलिदान दिवस समारोह आयोजित किया गया।उक्त समारोह में उनके कृतित्व व व्यक्तित्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओ ने कहा कि स्वामी जी का उदेश्य समाज को जोड़ना था?न कि धर्म व जाति के नाम पर बाटना था? वक्ताओ ने कहा कि वेद सार्वोपरी ग्रन्थ हैं। इसी के बल पर भारत विश्व गुरू बना। आर्य समाज आरा के तत्वाधान में प्रतिवर्ष की भांति बलिदान दिवस मनाया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिवेश में आवश्यकता है कि आडंबर से बचते हुए स्वामी जी के उदेश्य को जन जन तक पहुंचाया जाएगा।वहीं महिलाओं को सम्मान देते हुए आर्य समाज  से जोड़ा जाए। मैकाले के शिक्षा से संस्कार विहीन भारत के खिलाफ स्वामी जी ने गुरुकुल कि स्थापना किया। गौरतलब हो कि आरा आर्य समाज मंदिर स्थित श्रद्धानंद भवन में स्वामी श्रद्धानंद जी का 99 वीं बलिदान दिवस का आयोजन किया गया।मुख्य अतिथि व समस्त विद्वान विदुषी व्यक्तियों ने 19 वीं सदी के महानतम संत स्वामी दयानंद सरस्वती के  त्याग बलिदान पर विस्तृत चर्चा कर उन्हें नमन करते हुए उनके जीवन से समाज को प्रेरणा लेने का आवाहन किया। वैदिक मूल्यों की ओर लौट कर ही समाज का सर्वांगीण उत्थान संभव है। इसलिए आज भौतिकतावाद,भोगवाद अंधविश्वास,पाखंड-आडंबरों की अंधी दौड़ में फसी मानव जाति के उद्गार के लिए आर्य समाज से जुड़ने की आज के समाज की आवश्यकता है। समस्त संगठनों से ऊपर वैदिक संस्कृति भारतीय संस्कृति जो विश्व के विशिष्ट संस्कृति है। उसकी रक्षा कर ही हम वास्तविक रूप में राष्ट्र का गौरव बढ़ा सकते हैं।विश्व गुरु की संज्ञा प्राप्त करने की ओर अग्रसर हो सकते हैं।विश्व शांति की कल्पना यह जय घोष के साथ  सर्व मंगल प्रार्थना-सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया है। भारतीय संस्कृति को स्थापित करने के दिशा में आर्य समाज सतत प्रयत्नशील है।स्वामी श्रद्धांनंद का 23 दिसंबर 1926 को अब्दुल रशीद नाम के उन्मादी द्वारा गोली मार कर हत्या किया गया था। इनका जीवन पत्रकारिता, स्वतंत्रता सेनानी, अध्यापक व समाजसेवा में आर्य समाज के सन्यासी थे। वे भारत के उन महान राष्ट्भगक्त सन्यासियो में अग्रणी थे। जिन्होंने अपना जीवन स्वाधीनता स्वराज,शिक्षा तथा वैदिक धर्म के प्रचार प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय सहित अनेक शैक्षनिक संस्थानों की स्थापना की और हिंदू समाज व भारत को संगठित करने तथा 1920 के दशक में शुद्धि आंदोलन चलाने में भूमिका अदा कीये थे। उन्होंने अछूतो के लिए भी महान कार्य किया।

मुख्य अतिथि श्री दुर्गा राज जिलाध्यक्ष भाजपा, श्री रामानंद प्रसाद आर्य कार्यकारी प्रधान बिहार राज्य प्रतिनिधि सभा, श्री सिद्धेश्वर वर्मा, श्री सुखलाल प्रसाद श्री, महावीर विद्यालय विद्यासागर जी, श्री वेद आनंद जी,श्री विद्याभूषण जी,श्री संजय जी, श्री अरुण जी, प्रोफेसर हरि नारायण आर्य, डॉक्टर सुरेंद्र प्रसाद,श्री आरबी सिंह, श्री आचार्य ओम प्रकाश शास्त्री प्रधान आर्य समाज,श्री इंद्रमणि सिंह,आशीष कुमार शर्मा श्री धीरज कुमार गोविंद कुमार, श्री संजय वर्मा, श्री विनोद राज श्री सच्चिदानंद,श्री ज्ञानेश्वर प्रसाद आर्य,श्री ओम प्रकाश जी योगाचार्य स्वामी विक्रमादित्य की डॉक्टर उमेश प्रसाद जी,नीरज कुमार जी कोषाध्यक्ष,प्रकाश रंजन जी मंत्री,संतोष क्रान्तिकारी तथा सभा को प्राकृतिक योग पीठ ट्रस्ट के संस्थापक स्वामी विक्रमादित्य ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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