दुर्गा पूजा की उल्लास के बीच पिछले 422 दिनों से दिव्यांग जनों का राजभवन के समक्ष धरना जारी है, 16 सूत्री है मांग,केंद्र और राज्य सरकार नहीं ले रही सुध
गणादेश,रांची : राजधानी के राजभवन के समक्ष झारखंड दिव्यांग संघ पिछले 422 दिनों से अपनी 16 सूत्री मांगों को लेकर लगातार धरना पर बैठा है। पूरे राज्य में दुर्गा पूजा की भव्यता और उल्लास के बीच यह धरना समाज के उस वर्ग की पीड़ा को दर्शाता है, जो वर्षों से अपने हक और अधिकार के लिए संघर्ष कर रहा है। इस आंदोलन में पुरुषों के साथ बड़ी संख्या में दिव्यांग महिलाएं भी शामिल हैं।
धरना पर बैठी जीनहा महतो और गीता कुमारी ने कहा कि कई बार नेता और विधायक धरना स्थल पर आते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और वादों की झड़ी लगा जाते हैं, लेकिन अब तक किसी ने भी उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया। उन्होंने याद दिलाया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वर्ष 2019 के चुनाव में वादा किया था कि दिव्यांग पेंशन को 1000 रुपये से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दिया जाएगा। लेकिन 2025 आने के बाद भी यह वादा अधूरा है और दिव्यांग समाज निराशा में जी रहा है।
दिव्यांग ओमप्रकाश चौहान ने आरोप लगाया कि सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है। उन्होंने कहा कि 2016 से दिव्यांगों के लिए चार प्रतिशत आरक्षण तय है, लेकिन अब तक लागू नहीं हुआ। उन्होंने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में दिव्यांगों को दो प्रतिशत आरक्षण देने की भी मांग रखी, ताकि उनकी आवाज सदन तक पहुंच सके और समस्याओं का समाधान हो।
उन्होंने आगे कहा कि सरकार सामान्य महिलाओं को मुख्यमंत्री मइयां सम्मान योजना के तहत हर महीने 2500 रुपये देती है, जबकि दिव्यांगों को सिर्फ 1000 रुपये पेंशन मिलती है, वह भी समय पर नहीं। उन्होंने मांग की कि दिव्यांगों की पेंशन भी कम से कम 2500 रुपये की जाए।
झारखंड दिव्यांग संघ का कहना है कि जब तक उनकी 16 सूत्री मांगों पर राज्य और केंद्र सरकार की ओर से लिखित आदेश जारी नहीं होता, तब तक यह धरना जारी रहेगा। दिव्यांग समाज का यह लंबा आंदोलन न केवल उनकी उपेक्षा को उजागर करता है, बल्कि सरकार से जवाबदेही की मांग भी करता है।



