मौज-मस्ती के बाद 26 को ताजपोशी की तैयारी, जिप अध्यक्ष की कुर्सी पर ‘हरी अनंत हरी कथा अनंता’
भागलपुर। भागलपुर जिला परिषद की राजनीति एक बार फिर करवट ले चुकी है। तफरीह यानी इंडिया टूर पर निकले पूर्व जिला परिषद अध्यक्ष अनंत कुमार उर्फ टुनटुन साह के लॉबी की वापसी अब सिर्फ यात्रा की समाप्ति नहीं, बल्कि सत्ता में पुनः प्रवेश का संकेत मानी जा रही है। करीब 30 जिला परिषद सदस्यों की टोली के भरोसे टुनटुन साह की ताजपोशी लगभग तय मानी जा रही है। यह तफरीह बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल होते हुए फिलहाल उड़ीसा में झलक रही है। मौज – मस्ती की तस्वीरें जिप सदस्यों की टोली द्वारा अपने सोशल मीडिया, यानी फेसबुक पर लगातार डाली जा रही हैं। हालांकि इन तस्वीरों को धुंधला करने की कोशिशें भी पूरे जोर-शोर से जारी हैं। सबसे मजेदार बात यह है कि इन पलटीमार जिप सदस्यों को इस दफा तीसरी बार मौज-मस्ती के साथ हथेली गर्म करने का मौका मिला है।
दरअसल, नाथनगर विधानसभा सीट से विधायक बनने के 14वें दिन जिला परिषद अध्यक्ष मिथुन कुमार ने अपना इस्तीफा उप विकास आयुक्त (डीडीसी) को सौंप दिया। इसके बाद उपाध्यक्ष प्रणव कुमार उर्फ पप्पू ने अस्थायी रूप से जिम्मेदारी संभाल ली है, लेकिन यह व्यवस्था ज्यादा दिन टिकने वाली नहीं दिख रही।
जिला परिषद अध्यक्ष का चुनाव अब निर्धारित तारीख 29 से तीन दिन पहले, यानी 26 दिसंबर को होगा। संशोधित कार्यक्रम की जानकारी राज्य निर्वाचन आयोग ने डीएम को पत्र भेजकर दी है। आयोग से मिले संशोधित पत्र के बाद पार्षदों को नई तारीख की सूचना दे दी गई है। जिला पंचायत राज पदाधिकारी (डीपीआरओ) विकास कुमार ने बताया कि आयोग के निर्देश के अनुसार सभी पार्षदों को अवगत कराने की जिम्मेदारी जिला परिषद के अपर मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी (एसीईओ) को दी गई है। वे संशोधित चुनावी कार्यक्रम से संबंधित नोटिस सभी जिप सदस्यों को तामील कराएंगे।
जिला परिषद की कुल 31 सीटों में सियासी गणित लगभग साफ नजर आता है। एक ओर विपिन मंडल गुट के महज चार पार्षद हैं, तो दूसरी ओर पूर्व अध्यक्ष टुनटुन साह के समर्थन में करीब 20 पार्षदों का मजबूत जत्था खड़ा है। संख्याबल के लिहाज से तस्वीर स्पष्ट होने के बावजूद, अंदरखाने समीकरण बदलने की कोशिशें लगातार जारी हैं। पार्षदों के घरों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक सत्ता के गुणा-भाग की चर्चा गर्म है।
टुनटुन साह समर्थक खेमा खुलकर सामने आ चुका है। समर्थकों की लंबी सूची में गौरव राय, नाजनी नाज, नंदिनी सरकार, धनंजय कुमार, पियूष कुमारी, आशा जायसवाल, मो. आफताब, रिंकू सिन्हा, शबाना आज़मी सहित कई प्रभावशाली पार्षद शामिल हैं। यह खेमा न केवल संख्या में भारी है, बल्कि रणनीति के स्तर पर भी काफी सक्रिय नजर आ रहा है। वहीं दूसरा खेमा फिलहाल भूमिगत रणनीति पर काम करता दिख रहा है—न खुली बयानबाज़ी, न स्पष्ट दावेदारी, लेकिन अंदरूनी जोड़-तोड़ की सुगबुगाहट लगातार सुनाई दे रही है।
जिला परिषद अध्यक्ष की कुर्सी के लिए दावेदार तैयार हैं, खेमे सक्रिय हैं और भागलपुर की जिला राजनीति एक बार फिर सस्पेंस के मोड़ पर खड़ी है। क्या मौज-मस्ती से लौटते ही टुनटुन साह सत्ता की कुर्सी संभालेंगे, या कोई नया राजनीतिक उलटफेर सामने आएगा—इसका जवाब अब चुनावी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही मिलेगा। फिलहाल, भागलपुर की सियासत इंतज़ार में है। वैसे, मौज-मस्ती के बाद 26 को ताजपोशी की तैयारी, जिप अध्यक्ष की कुर्सी पर ‘हरी अनंत हरी कथा अनंता’ अभी तक तय।



