झारखंड JPSC-JSSC विवाद: छात्रों के समर्थन में निर्जला अनशन पर बैठे विधायक जयराम महतो, सरकार को दी चेतावनी
रांची: जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले कुछ हफ्तों से जो सुलगता हुआ गुस्सा दिख रहा था अब उसने एक नया और बड़ा मोड़ ले लिया है। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित धांधलियों , पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ में छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा है। इसी बीच डुमरी विधायक और झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के प्रमुख जयराम महतो छात्रों की इस लड़ाई में खुलकर मैदान में उतर आये हैं और पुराने विधानसभा परिसर में एक दिन के निर्जला अनशन पर बैठ गये हैं।
क्यों भड़का है छात्रों का यह आंदोलन?
राजधानी रांची में चल रहा यह छात्र आंदोलन कोई एक-दो दिन का मामला नहीं है। पिछले 15 दिनों से छात्र सड़क पर हैं और भूख हड़ताल कर रहे हैं। छात्रों का आरोप है कि परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर झोल-झाल हुआ है।
सीटों की खरीद-फरोख्त: पैसे लेकर अयोग्य उम्मीदवारों को पास कराने के गंभीर आरोप सामने आयें हुये हैं।
पेपर लीक और ओएमआर में हेराफेरी: घर पर प्रश्न पत्र मंगाकर परीक्षा लिखवाने और खाली OMR शीट को बाद में भरने जैसी धांधलियों ने छात्रों का भविष्य अंधकार में डाल दिया है।
बिगड़ती सेहत
लगातार भूख हड़ताल पर बैठे रहने के कारण कई छात्रों की तबीयत तक बिगड़ चुकी है, लेकिन प्रशासन की तरफ से ठोस कदम न उठाये जाने से युवाओं में भारी आक्रोश है।
विधायक जयराम महतो की सरकार को दो-टूक चेतावनी
अनशन पर बैठने से पहले जयराम महतो ने साफ शब्दों में सरकार को आड़े हाथों लिया है। उन्होंने कहा कि छात्रों की यह आवाज पूरे राज्य और देश के कानों तक गूंज रही है, लेकिन शायद सरकार के बहरे कानों तक यह बात नहीं पहुंच रही है।
उन्होंने सरकार के सामने तीन मुख्य मांगें रखी हैं:
परीक्षाओं को रद्द करें TDPL द्वारा ली गई JPSC और JSSC की सभी विवादित नियुक्ति परीक्षाओं को तुरंत रद्द किया जाये।
दोषियों पर शिकंजा इस पूरे घोटाले में शामिल दोषियों को गिरफ्तार किया जाये और इसकी जांच CBI या ED से कराई जाये।
पदाधिकारियों की संलिप्तता की जांच आयोग के जिन-जिन अधिकारियों और पदाधिकारियों के नाम इस गड़बड़ी में आ रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच हो।
समाज के हर वर्ग से समर्थन की अपील
जयराम महतो ने सिर्फ राजनीति करने के बजाय इस मुद्दे को एक जन-आंदोलन बनाने की अपील की है। उन्होंने राज्य के मजदूरों, किसानों, व्यापारियों, वकीलों और प्रोफेसरों से आग्रह किया है कि वे अपने-अपने स्तर पर , चाहे दो घंटे धरना देकर या मौन रख करके इन पीड़ित छात्रों का साथ दें। उनका साफ कहना है कि अगर इस एक दिन के उपवास से सरकार नहीं जागती है तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन की रूपरेखा और भी कड़ी होगी।


