केंद्र सरकार ने भारत के एजुकेशन सिस्टम को रिजेक्शन सिस्टम बना दिया है : शिल्पी नेहा तिर्की

रांची: झारखंड सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने गुरुवार को गुवाहाटी में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आह्वान पर आयोजित “छात्रों की गूंज” अभियान के तहत मीडिया से संवाद करते हुए देश की शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़ते भ्रष्टाचार, पेपर लीक और युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों को मजबूती से उठाया।
उल्लेखनीय है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व द्वारा इस राष्ट्रीय अभियान के अंतर्गत देश के 28 शहरों में 28 नेताओं को मीडिया संवाद की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसी क्रम में झारखंड से मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की को गुवाहाटी में छात्रों और युवाओं की आवाज़ उठाने की जिम्मेदारी दी गई है।
मीडिया को संबोधित करते हुए शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि हमारे देश में माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा के लिए खेत बेच देते हैं, गहने गिरवी रख देते हैं और कर्ज तक ले लेते हैं। उनका सपना होता है कि उनका बेटा-बेटी अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर आगे बढ़े, सम्मानजनक जीवन जिए और परिवार का सहारा बने।
लेकिन जब प्रश्नपत्र लीक होते हैं, परीक्षाएं रद्द होती हैं, भर्ती प्रक्रियाएं वर्षों तक लंबित रहती हैं और भ्रष्टाचार युवाओं की मेहनत पर भारी पड़ता है, तब केवल एक परीक्षा नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के सपने टूटते हैं।
उन्होंने कहा कि कोटा सहित देश के विभिन्न हिस्सों में अनेक प्रतिभाशाली छात्रों ने प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव, अनिश्चितता और व्यवस्था की खामियों के बीच अपनी जान गंवाई है। ये केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि बिखरे हुए परिवारों, टूटे हुए सपनों और युवाओं के भविष्य की दर्दनाक कहानियां हैं।
शिल्पी नेहा तिर्की ने केंद्र सरकार से सवाल पूछते हुए कहा—

  • क्या माता-पिता के त्याग और बलिदान का कोई मूल्य नहीं है?
  • आखिर कब तक छात्रों का भविष्य पेपर लीक माफियाओं और भ्रष्ट व्यवस्था की भेंट चढ़ता रहेगा?

उन्होंने केंद्र सरकार के समक्ष निम्नलिखित मांगें रखीं—
• धर्मेंद्र प्रधान अविलम्ब इस्तीफ़ा दे।

  • पेपर लीक, भर्ती घोटालों और परीक्षा संबंधी भ्रष्टाचार में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए तथा जिम्मेदार अधिकारियों और संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
  • राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाया जाए।

उन्होंने कहा कि केवल कुछ लोगों की गिरफ्तारी कर सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। यह समस्या कुछ व्यक्तियों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम में व्याप्त खामियों का परिणाम है। इसलिए व्यापक और ठोस सुधारों की आवश्यकता है।

शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जवाबदेही में विश्वास करते हैं, तो उन्हें देश में बार-बार हो रही परीक्षा संबंधी विफलताओं और पेपर लीक की घटनाओं की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षाओं का मुद्दा नहीं है, बल्कि करोड़ों युवाओं के सपनों, उनके संघर्षों, उनके भविष्य और भारत के निर्माण का प्रश्न है। देश का युवा जवाब चाहता है और उसे न्याय मिलना चाहिए।

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