धधकते अंगारों पर दौड़ीं आदिवासी नेत्री निशा भगत, बोलीं- महादेव ही आदिवासियों के सबसे बड़े देवता
रांची: झारखंड में सरना और सनातन को लेकर चल रही बहस के बीच आदिवासी नेत्री निशा भगत ने मंडा पूजा के अवसर पर अपनी आस्था और विचारों को खुलकर सामने रखा। धधकते अंगारों पर चलकर उन्होंने मंडा पूजा में भाग लिया और कहा कि महादेव ही आदिवासियों के सबसे बड़े देवता हैं। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की आस्था, संस्कृति और परंपराओं के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।
निशा भगत ने कहा कि मंडा पूजा आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा समुदाय की सबसे प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं में से एक है। इस पूजा में समाज के सभी वर्गों की भागीदारी होती है और यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति और सामुदायिक एकता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मंडा पूजा मूल रूप से महादेव की आराधना का पर्व है और आदिवासी समाज सदियों से प्रकृति के साथ-साथ शिव की भी पूजा करता आया है।
उन्होंने सरना और सनातन को लेकर चल रही बहस पर कहा कि दोनों परंपराओं में प्रकृति पूजा और आध्यात्मिक मूल्यों की समानता दिखाई देती है। उनके अनुसार हिंदू कोई एक धर्म नहीं, बल्कि भारत की सभ्यता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। सरना और सनातन दोनों ही भारतीय संस्कृति की जड़ों से जुड़े हुए हैं और मंडा पूजा इनके बीच के सांस्कृतिक संबंध को दर्शाती है।
निशा भगत ने कहा कि आदिवासी समुदाय इस देश का मूल निवासी है और उसकी पहचान तथा परंपराओं को कमजोर करने की किसी भी कोशिश का विरोध किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग धर्मांतरित हो चुके हैं, वे सरना और सनातन को अलग-अलग नजरिए से देखते हैं। अंत में उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग सबसे पहले भारतीय हैं और समाज को विभाजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।



