पीएम मोदी की सोना नहीं खरीदने की अपील पर झारखंड के सर्राफा कारोबारियों में मायूसी, चेम्बर ने देशहित में किया समर्थन

रांची : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोगों से एक वर्ष तक सोना नहीं खरीदने की अपील किए जाने के बाद झारखंड के सोना-चांदी कारोबारियों में मायूसी देखी जा रही है। राज्यभर के सर्राफा व्यापारियों ने इस अपील को व्यापार और रोजगार के लिए नुकसानदायक बताते हुए चिंता जताई है। व्यापारियों का कहना है कि पहले से ही महंगाई, अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव और घटती खरीदारी के कारण सर्राफा बाजार दबाव में है। ऐसे समय में इस तरह की अपील से कारोबार और अधिक प्रभावित हो सकता है। हालांकि कुछ व्यापारियों ने इसे देशहित में उठाया गया जरूरी कदम बताया है।
सोना-चांदी व्यापारी मनीष सोनी,जितेंद्र वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री की अपील के बाद व्यापार पर असर जरूर पड़ रहा है, लेकिन यदि यह फैसला देशहित में है तो व्यापारी वर्ग इसे स्वीकार करेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह कोरोनाकाल में लोगों ने धैर्य के साथ कठिन समय का सामना किया था, उसी प्रकार यह दौर भी गुजर जाएगा।
वहीं अन्य व्यापारियों ने कहा कि सोना-चांदी का व्यवसाय केवल बड़े कारोबारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे लाखों कारीगर, छोटे दुकानदार, कर्मचारी और उनके परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। यदि लंबे समय तक सोने की खरीदारी प्रभावित रही तो रोजगार पर इसका सीधा असर पड़ेगा। खासकर शादी-विवाह और पारंपरिक अवसरों पर होने वाली खरीदारी में भारी गिरावट आने की आशंका जताई जा रही है।
सोना चांदी व्यवसाई संघ के पूर्व सचिव सुनील सोनी ने कहा कि सोना-चांदी की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है,लोगों के पास पैसा नहीं है तो एक साल बाद क्यों खरीदेंगे। पीएम मोदी की यह अपील हम सोना चांदी व्यवसायियों के लिए घाटे का सौदा है। एक साल के बाद सोना चांदी की कीमत बढ़ जाएगा तो जनता कहां से सोना खरीदेगा। हमलोग भी दुकान बंद बीजेपी कार्यालय में चाबी सौंपा देंगे। हमलोगों का घर मोदी चलाएगा। सुनील सोनी ने कहा कि शनिवार को रांची में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
इधर फेडरेशन झारखंड चेम्बर ऑफ कामर्स ने भी देशहित में प्रधानमंत्री के बयान का समर्थन किया है। चेम्बर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने कहा कि व्यापारियों की चिंता अपनी जगह सही है, लेकिन वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम जरूरी माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि देश में बड़ी मात्रा में सोने का आयात होता है, जिससे विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ता है। निर्यात क्षेत्र पहले से चुनौतियों का सामना कर रहा है और डॉलर की बढ़ती कीमत भी चिंता का विषय है।
व्यापारियों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस तरह के फैसलों से पहले व्यापारिक संगठनों से चर्चा की जाए। साथ ही सरकार ऐसा संतुलित कदम उठाए जिससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत रहे और व्यापार तथा रोजगार पर भी नकारात्मक असर न पड़े।

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