कलयुग में गोविन्द का नाम ही सर्वोत्तम:दयानंद शास्त्री
पटना/आरा।कलयुग में गोविन्द का नाम ही सर्वोत्तम है!भगवान सिर्फ भाव के भूखे होते हैं!उक्त बातें दयानंद शास्त्री जी महाराज ने कही!वे सोमवार को भोजपुर जिले के चरपोखरी प्रखण्ड के सोनवर्षा स्थित देश में प्रसिद्ध श्रीतोताद्रिमठ लक्ष्मीनारायण आश्रम पर पूज्य बैकुंठवाशि संत त्रिदण्डी स्वामी जी के पुण्य स्मृति महोत्सव के उपलक्ष्य में भागवत कथा को संबोधित कर रहे थे। गौरतलब हो कि मठाधीश व यज्ञाधीश अनन्त विभूषित श्री स्वामी रंगनाथाचार्य जी महाराज के मंगल कामना के साथ श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में हजारों के संख्या में हरि भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। ग्रामीण इलाकों के दुर दुर से पहुँचे भक्तों से पंडाल भक्तिमय हो गया। जहाँ व्यासपीठ पर विधिवत रूप से पूजन के उपरांत अन्तर्राष्ट्रीय कथावाचक पूज्य श्री दयानन्द शास्त्री जी महाराज ने भगवान् श्रीकृष्ण के दिव्य लीलाओं की चर्चा करते हुए कहा कि सर्वधर्म का परित्याग कर श्रीकृष्ण के शरण में जो जाता है! उसका कल्याण निश्चित ही हो जाता है! क्योंकि नटखट रिरिधर गोपाल की लीला निराली है। वे अपने भक्तों का कष्ट हरने वाले हैं ।जिनके नाम मात्र से ही बड़े बड़े संकट से मनुष्य मुक्त हो जाता है। भगवान श्री कृष्ण हमेशा ही भक्तों का कल्याण करते हैं।
उन्होंने वर्तमान में फैल रहे पाखंड से सबको बचाने का उपदेश देते हुए बोले कि शिव चर्चा के नाम पर कटे शिर भगवान् शिव की पूजा करना विपत को बुलाने जैसा है?वहीं मंगल व विकास की कामना से घर में गाय पालना चाहिए!वहीं विनाश के कामना से कुत्ता पालना?
सनातन धर्म जीव रक्षा के लिए कहता है! वहीं वासनामय नव भौतिकवाद और वेद विहीन कार्य सभी अच्छाई को गौण कर, विनाश के रास्ते पर ले जाता है।आत: इससे बचना चाहिए।
इस पावन अवसर पर सन्त, महन्त, विद्वान उपस्थित रहे। इस मौके पर जिले के कई सम्मानित लोगों को स्वामी रंगनाथाचार्य जी महाराज के द्वारा व्यास पीठ से सम्मानित किया गया। इस आयोजन में हर रोज भंडारे का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें लोगों के बीच प्रसाद वितरण से लेकर प्रसाद ग्रहण कराया जा रहा है। इस आशय की जानकारी आयोजन समिति के मीडिया प्रभारी चंदन कुमार ने दी।



