जलसे में दिया गया आपसी- भाईचारे का संदेश

बोकारो,कसमार: बोकारो जिला के कसमार प्रखंड के गर्री में 100 वर्ष पूर्व दान दी गई जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की खुशी में बड़े श्रद्धा और उत्साह के साथ जश्ने जलसा का आयोजन अध्यक्षता पूर्व सदर व हाजी मोहम्मद शेखावत अंसारी ने की। इस अवसर पर हाजी शेखावत ने मुस्लिम धर्मावलंबी को संबोधित करते हुए कहा कि आपसी भाईचारा और एकता इस्लाम की बुनियाद है,और इसी से समाज में अमन और सौहार्द बना रहता है। जो व्यक्ति अपने माता-पिता की सेवा करता है वह जन्नत का हकदार होता है। जलसे सदर शेखावत ने बताया कि सन 1913 ई० में नावल्द मोसमात पचिया पति मरहूम अन्नू मियां ने अपनी समस्त जमीन गांव के मस्जिद, मदरसा, इमामबाड़ा व ईदगाह के लिए दान दी थी। लेकिन इस बावत कोई सरकारी कागजात नहीं होने एवं मालगुजारी जमा नहीं होने के कारण सन 1925 में उक्त जमीन की सरकार की ओर से निलामी नोटिस होने के बाद गणमान्य लोगों ने हजारीबाग जाकर समाज के ही कुछ लोगों ने धोखा देते हुए कुल 6.64 एकड़ जमीन को आधी-आधी अपने नाम से कागज बना ली और धीरे-धीरे जमीन को अपने कब्जे में का कर ली थी। जब इसकी भनक गांव वालों को 45 साल बाद यानि 1970 में पता चला। इसके बाद गांव के महरूम तजमूत हुसैन, अकबाल हुसैन, सुल्तान हुसैन, मास्टर जहीर, महबूब अंसारी, असगर अली, नौशाद अंसारी, हाजी दिलमोहम्मद अंसारी, यूशूफ अंसारी, मनसूर अंसारी, शेखावत अंसारी, मनवर अंसारी, मंजर ईमाम, इस्लाम अंसारी, अलाउद्दीन अंसारी व अजीमुद्दीन अंसारी को हजारीबाग, गिरिडीह, तेनुघाट व, बोकारो आदि कोर्ट कचहरी में फरियाद ले जाकर काफी जद्दोजहद करना पड़ा। तब जाकर 2023 में दोनों परिवारों ने उक्त जमीन को कब्जा मुक्त कर दिया। इधर जलसे को सफल बनाने में नौजवान फिरोज अंसारी, तालिब अंसारी, शाहिद अंसारी, तबारक अंसारी, अफसर अंसारी, मेहंदी हुसैन, असलम अंसारी व अहमद अंसारी समेत तमाम लोगों की सराहनीय भूमिका रही।

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