भागवत कथा सुनने बड़ी संख्या में उपस्थित हुए श्रद्धालु

खूंटी: एकदिवसीय भागवत गीता पाठ में श्रीमद् भागवत कथा के ऊपर प्रवचन करते हुए शुकामृत दास ने कहा कि भगवान श्री कृष्ण के लिए किया गया कर्म ही अर्चन है। यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत्। यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम्॥ 9.27
हमें यज्ञ ,दान, तपस्या प्रत्येक कर्म भगवान श्री कृष्ण की प्रसन्नता हेतु करना चाहिएl हमें किसी भी दशा में भगवान को नहीं भूलना चाहिए मगर आजकल लोग भोगी और तथाकथित त्यागी हो गए हैं भगवत गीता हमें सिखाता है भोग छोड़ो त्याग छोड़ो भक्ति से नाता जोड़ो l
हमें परमपिता के बताए गए मार्ग में चलकर शुद्ध सत्व धर्म का पालन करना चाहिए कईत्व धर्म (झूठा धर्म) से बचना चाहिएl हमें मोक्ष तक की कामना नहीं करनी चाहिए जिसे कईत्व प्रधान कहा गया हैl हमें अज्ञानता के अंधकार से काम भरी आसक्ति से निष्काम अन्नाशक्त होकर निष्काम कर्म योग करना चाहिए l जिससे भक्ति योग का मार्ग प्रशस्त होगा हम भोगी से भक्त बन पाएंगे और एक दिन भगवान को पाएंगेl भक्तिमई जीवन कर्मियों के जीवन से बेहतर हैl जिसके कर्मों से धर्म और वैराग्य दोनों आता है, वह जीवन भर आध्यात्मिकता में आनंद लुटता है और एक दिन भगवान के धाम जाता है और जो भक्ति में नहीं लगा है वह दिन भर पछताता हैं उसका पूरा जीवन तनाव, दुख और पीड़ा में गुजर जाता है l इसीलिए हमें नित्य भगवान की वाणी भगवतम वैष्णव जनों को अत्यंत प्रिय लगने वाली पवित्र ग्रंथ का अध्ययन करना चाहिए l हमें आराम नहीं उस परमेश्वर की सेवा में सब कुछ अर्पण करते हुए लगे रहना चाहिए यही भागवत गीता हमें सिखाती हैl

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