58वां अभियंता दिवस: उत्कृष्ट इंजीनियरों का हुआ सम्मान, मंत्री दीपिका पांडेय सिंह बोलीं – आधुनिक झारखंड के निर्माण में इंजीनियरों की भूमिका सबसे अहम
रांची: राजधानी रांची के शौर्य भवन में सोमवार को भारत रत्न मोक्षगुंडम विश्वेश्वरैया की 164वीं जयंती अभियंता दिवस के रूप में गरिमामय तरीके से मनाई गई। जेईएसए अध्यक्ष प्रभात कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित 58वें अभियंता दिवस समारोह का शुभारंभ ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री योगेंद्र प्रसाद और पर्यटन एवं नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने संयुक्त रूप से किया। इस दौरान महान अभियंता विश्वेश्वरैया के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई।
समारोह में बेहतरीन कार्य करने वाले पांच अभियंताओं – सत्येंद्र कुमार सिंह, देवाशीष लहरी, अभिनंदन कुमार, विजय शंकर और मो. जमील अख्तर – को सम्मानित किया गया। इसके अलावा कार्यक्रम के सहयोगियों और प्रायोजकों को भी सम्मानित किया गया।
मुख्य अतिथि मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि “आधुनिक भारत की कल्पना में इंजीनियरों की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। झारखंड अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरे कर रहा है, और आने वाले वर्षों में राज्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में इंजीनियरों का योगदान बेहद अहम होगा।” उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि “आज भी तिलैया डैम जैसे दशकों पुराने निर्माण मजबूत हैं, जबकि हाल के कई स्ट्रक्चर कमजोर साबित हो रहे हैं। इसलिए इंजीनियरों को टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण निर्माण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।”
मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने इंजीनियरों को राज्य के विकास का असली निर्माता बताते हुए कहा कि योजनाओं के रखरखाव पर भी गंभीरता से काम करना होगा। उन्होंने इंजीनियर अकादमी के गठन, जमीन उपलब्ध कराने और प्रमोशन नियमों में सुधार का आश्वासन दिया।
पर्यटन एवं नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने कहा कि “इंजीनियर निर्माण और विकास के स्तंभ हैं। आधुनिक झारखंड के इतिहास में उनके योगदान को स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।” उन्होंने सिरमटोली ब्रिज को इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया।
इस अवसर पर इंजीनियर संघ ने ट्रेनिंग सेंटर, संघ के लिए जमीन और 60-40 पॉलिसी पर पुनर्विचार जैसी मांगें मंत्रियों के समक्ष रखीं।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रधान सचिव मस्तराम मीणा ने कहा कि विश्वेश्वरैया का जीवन भले 101 वर्षों तक रहा हो, लेकिन उनकी उपलब्धियां अमर हैं और वे हमेशा अभियंताओं के लिए प्रेरणास्त्रोत बने रहेंगे।
👉 यह दिवस न सिर्फ इंजीनियरों के सम्मान का प्रतीक बना, बल्कि राज्य के सर्वांगीण विकास में उनकी अहम जिम्मेदारी और भूमिका को भी रेखांकित करता रहा।



