दो अर्थियां, एक घर – सन्नाटे में डूबा ओलपुरा: भाई ही बना काल, हत्यारोपी को गिरफ्तार कर ले गई पुलिस
भागलपुर। जिले के घोघा थाना क्षेत्र स्थित ओलपुरा गांव की उस सुबह ने सूरज तो देखा, पर उजाला नहीं। गांव की गलियों में जब एक साथ दो अर्थियां निकलीं, तो हर आंख नम थी और हर दिल सन्न। एक ही चिता पर दो सगे भाइयों की असमय विदाई ने पूरे गांव को गूंगे शोक में डुबो दिया।जमीन के चंद टुकड़ों की लड़ाई ने परिवार को ऐसा ज़ख्म दिया, जिसकी टीस पीढ़ियों तक महसूस होगी। अपने ही खून – अवध पाठक – ने चाकू की नोंक पर भाईचारे का कत्ल कर डाला। नीरज पाठक और हरिद्वारिका पाठक (उर्फ गुडेश) के लहूलुहान शरीरों ने अस्पताल पहुंचने से पहले ही हार मान ली।अंतिम संस्कार… परंपरा भी शोक से टूटीपरिवार की टूटी रीढ़ ने संस्कार की परंपरा भी डगमगाई। घर में कोई बड़ा न था, और जो थे, वे सदमे में। ऐसे में मानसिक रूप से बीमार भाई गणेश ने कांपते हाथों से मुखाग्नि दी। कोई कंधा न मिला, कोई बंधु साथ न चला। ट्रैक्टर पर लादकर ले जाई गईं लाशें और चिता की आग में जली वो उम्मीदें, जो एक घर को “परिवार” बनाती हैं।गांव में पसरा सन्नाटा, डर के साए में सांसेंघटना के बाद गांव में मातमी सन्नाटा पसरा है। लोग अपने घरों में दुबक गए हैं। अवध पाठक की हिंसा ने रिश्तों पर से भरोसे को खत्म कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी के भीतर लंबे समय से गुस्से का ज्वालामुखी सुलग रहा था – बस, धमाका उस रात हुआ।बहन की एंट्री ने भड़काई चिंगारीसूत्रों की मानें, तो विवाद महज पांच कट्ठा ज़मीन का था, लेकिन जब बहन की दखलअंदाजी हुई, तब मामला और उलझ गया। उस रात दरवाजा अंदर से बंद किया गया और फिर खून का खेल शुरू हुआ। चीखों ने गांव को जगा दिया, पर बहुत देर हो चुकी थी।भागने की कोशिश, फिर गिरफ्तारीहत्याकांड के बाद अवध पाठक खुद को निर्दोष बताकर घोघा थाने पहुंचा, पर पुलिस की जांच ने उसकी कहानी को झूठा साबित कर दिया। वह मायागंज अस्पताल में इलाज करवा रहा है और अब पुलिस हिरासत में है।एक परिवार… एक त्रासदी… और बिखरता समाजओलपुरा की इस दिल दहला देने वाली घटना ने यह साफ कर दिया है कि जब रिश्तों में ज़मीन की दीवार खड़ी हो जाती है, तो घर महलों में भी नहीं बचते। एक ही मां की कोख से जन्मे तीन भाई—अब दो पंचतत्व में विलीन और एक सलाखों के पीछे। इस गांव की हवा अब भी भारी है। न सिर्फ दो शवों के बोझ से, बल्कि रिश्तों के टूटने की गूंज से।



