भागलपुर: गंगा के आर-पार बाढ़ और कटाव से  हाहाकार, बोरियों में भर-भर कर हो रहा उपचार

प्रदीप विद्रोही,भागलपुर। जिले की गंगा धारा उफान पर है। कोसी नदी में भी जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। फसलें अकाल मौत मरने लगी हैं। गंगा और कोसी की मंशा अब स्पष्ट दिख रही है। सवाल है-कौन रोकेगा गंगा को ?

गंगा पार, नवगछिया अनुमंडल के गोपालपुर व इस्माईलपुर प्रखंड के बिंदटोली गांव में गंगा का जलस्तर दिन-रात बढ़ रहा है। तटीय इलाकों में तबाही और तांडव भयावह रूप ले चुके हैं। तटबंध को बचाने की कवायद युद्धस्तर पर जारी है। बाढ़ और कटाव के हाहाकार से निपटने के लिए बोरियों में भर-भरकर उपचारात्मक कार्य किए जा रहे हैं। दियारा क्षेत्र में मकई और सब्जियों की फसलें डूबने लगी हैं।

स्पर संख्या नौ पर तीन दिन पूर्व हुए कटाव को देखते हुए लगातार निगरानी की जा रही है। अभियंताओं का कहना है कि फिलहाल कटाव थम गया है, जिससे स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन ग्रामीणों सहित पशुओं की बेचैनी अब दिखने लगी है। चारों ओर हताश और उदास निगाहें नजर आ रही हैं।

मशाढू में महिलाएं “गंगिया” को मनाने के लिए अनुनय-विनय करने लगी हैं। सबौर प्रखंड स्थित ग्राम पंचायत ममलखा का ऐतिहासिक कालीघाट—जिसमें पीपल का वृक्ष और बजरंबली मंदिर शामिल थे—सोमवार को पूरी तरह गंगा में समा गए। ममलखा की धरती में मां गंगा अब प्रवेश कर चुकी हैं। अनिष्ट की आशंका से लोग रतजगा कर रहे हैं। टपुवा में खेतिहर ज़मीन जलमग्न होने लगी है। लहलहाते फसलों को बचाना अब कठिन होता जा रहा है। जिला प्रशासन अपनी लंबी-चौड़ी घोषणाओं के ज़रिए लोगों से इस बाढ़ में धैर्य बनाए रखने की अपील कर रहा है। प्रशासन का दावा है कि आपदा प्रबंधन की टीमों को मौके पर तैनात कर दिया गया है।

जिला प्रशासन के आकलन व पूर्वानुमान के अनुसार, जिले के 15 अंचलों के 122 पंचायतों के 447 गांव ऐसे हैं, जिन्हें बाढ़ से प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है।

आपदा प्रबंधन की तैयारी:
आपदा प्रबंधन के तहत भागलपुर जिला प्रशासन द्वारा संभावित बाढ़ से निपटने हेतु व्यापक तैयारी की गई है। जिले के सभी 16 अंचलों के 238 पंचायतों में ऑटोमैटिक रेन गेज (वर्षा मापक यंत्र) अधिष्ठापित हैं और कार्यरत भी हैं। बाढ़ की आशंका को देखते हुए 94 राहत एवं बचाव दलों का गठन किया गया है:

भागलपुर सदर: 50
नवगछिया: 33
कहलगांव: 11
सुल्तानगंज: 4
सबौर: 8
इन सभी टीमों के साथ एसडीआरएफ के 57 जवान भी तैनात किए गए हैं।

मानव राहत शिविर एवं भोजन व्यवस्था:
भागलपुर सदर: 70
नवगछिया: 50
कहलगांव: 51
कुल: 171 मानव राहत शिविर चिन्हित किए गए हैं, जहाँ सामुदायिक रसोई चलाई जाएगी।
आपदा सम्पूर्ति पोर्टल पर दर्ज परिवारों का विवरण:

भागलपुर सदर: 1,72,872
नवगछिया: 69,489
कहलगांव: 1,64,146
कुल: 4,06,507 परिवार
चिकित्सा और स्वास्थ्य सुविधा:
हाइड्रोजन टैबलेट: 3,65,093
ओआरएस पैकेट: 15,07,141
सर्पदंश की दवा: 4,980
एंटी रेबीज वैक्सीन: 61,641
अजिथ्रोमाइसीन टैबलेट: 19,35,437
अजिथ्रोमाइसीन सिरप: 13,555
186 चिकित्सा राहत केंद्र, 28 पशु स्वास्थ्य केंद्र, और 33 उप-पशु स्वास्थ्य केंद्र चिन्हित हैं, जहां 31 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं।

तटबंध सुरक्षा कार्य:
मिट्टी भराई: 35.30 मीटर
सीट पीलिंग: 242 मीटर
बोल्डर क्रेटिंग: 570 मीटर
गैबियन वर्क: 440 मीटर
एनसी वर्क: 242 मीटर
जियो बैग (2 लेयर पिचिंग): 19,751
अन्य संसाधन:
गोताखोर: 248
भागलपुर सदर: 78
नवगछिया: 76
कहलगांव: 94
आपदा मित्र: 501
भागलपुर सदर: 204
नवगछिया: 196
कहलगांव: 101
निजी नावें: 128
भागलपुर सदर: 40
नवगछिया: 66
कहलगांव: 22
जिले में 12 टेंट, 1 महाजाल, 95 लाइफ जैकेट और 22,302 पॉलिथीन शीट उपलब्ध हैं। इसके अलावा 200 लाइफ जैकेट की खरीद के लिए निविदा निकाली गई है। आपात स्थिति से निपटने के लिए जिला बाढ़ नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है।

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