आदिवासी हुंकार महारैली का गूंज दिल्ली तक सुनाई देगी : लक्ष्मीनारायण मुण्डा
गणादेश,रांची : कुड़मी जाति के अनुसूचित जनजाति एसटी बनने की मांग के विरोध में आगामी 17 अक्टूबर को आदिवासी हुंकार महारैली की तैयारी को लेकर एचईसी प्रभात तारा मैदान में सभी आसपास के स्थानीय कार्यकर्ताओं की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक में सभी कार्यकर्ताओं ने अपनी-अपनी तैयारी की बातों को रखा। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री गीताश्री उरांव ने कहा कि 17 अक्टूबर की महारैली आदिवासी समुदाय की हक-अधिकार बचाने की लड़ाई का आगाज है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय अपने संघर्षों के बलबूते लड़ाई लड़ती रही है।
आदिवासी नेता लक्ष्मीनारायण मुंडा ने कहा कि कुड़मी/ कुरमी जाति के लोगों की यह मांग मूल आदिवासियों के संवैधानिक हक-अधिकारों राजनीतिक प्रतिनिधित्व – हिस्सेदारी आरक्षण ,नौकरी,जमीन और गौरवशाली संघर्षशील आदिवासी विद्रोह के इतिहास पर कब्जा करके मूल आदिवासियों को हाशिए में धकेलने की साज़िश है। ये मांगें आदिवासियों की पहचान,अस्तित्व संवैधानिक अधिकारों पर हमला है। इस महारैली में राज्य भर के सभी पारंपरिक अगुआ आदिवासी समुदाय के प्रतिनिधियों को आने की अपील किया गया है।
इस बैठक में मुख्य रुप से गीताश्री उरांव, लक्ष्मीनारायण मुंडा, डॉ० बिरसा उरांव, रंजन खलखो,दरिद्र चंद्र पहान, शिवरतन मुंडा, सुनित मुंडा,ललित उरांव, जगेश्वर मुंडा, गीता कुजूर, रमेश उरांव, आशा कच्छप,नीलम उरांव, रोहित लिंडा,सिंह सोय,रोशन कच्छप, अरुण महली मंजीत लिंडा, चंद्रा उरांव,बनसिंह उरांव, दिनेश तिर्की, अरुण मुंडा, संदीप उरांव सहित दर्जनों कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।



