ख़ामोश खतरे की दस्तक: कहलगांव में ‘ऐशमॉग’ का फैलता जाल! क्योंकि यह धुंध नहीं जहर है!

भागलपुर। एनटीपीसी कहलगांव से सटे इलाक़े इन दिनों एक नए जहर ‘ऐशमाॅग’ के शिकंजे में जकडता जा रहा है। कहलगांव की हवा तेजी से खतरनाक होती जा रही है। जो लोग इसे सामान्य कुहासा समझकर नजरअंदाज कर रहे हैं, उन्हें सावधान हो जाना चाहिए। क्योंकि यह सिर्फ फॉग नहीं, बल्कि फ्लाई ऐश और नमी के मिलन से बना जहरीला मिश्रण ‘ऐशमॉग’ है, जो धीरे-धीरे लोगों की सांसों में ज़हर घोल रहा है।

क्या है ‘ऐशमॉग’ :यह कोई प्राकृतिक धुंध नहीं, बल्कि थर्मल पावर प्लांट्स से निकलने वाली फ्लाई ऐश जब वातावरण में मौजूद कुहासे से मिलती है, तो एक घना, सूक्ष्म कणों वाला प्रदूषण तैयार होता है। ये कण इतने बारीक होते हैं कि सीधे नाक, गले और फेफड़ों में जाकर जमा हो जाते हैं।

एक दर्दनाक सच्चाई:कहलगांव के पास रहने वाले अवकाश प्राप्त शिक्षक सह वरिष्ठ पत्रकार प्रो. डॉ. पवन कुमार सिंह ने जो अनुभव साझा किया, वह किसी चेतावनी से कम नहीं। ‘मेरे साइनस में फ्लाई ऐश जम गया था। हालत इतनी बिगड़ गई कि जलनेति के बाद छींक के साथ नाक से राख की गोलियां निकलने लगीं। खून और दुर्गंधयुक्त पस भी निकला… कई दिनों की गहन चिकित्सा के बाद जाकर राहत मिली।’ यह कोई एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि उस खतरे का संकेत है जो धीरे-धीरे पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले रहा है। सजन कुमार सिंह जो वर्षों से शहर स्थित नाथलोक में रहते हैं उन्हें सीएमसी वेल्लोर के एक डॉक्टर ने जांचोपरांत कहा कि आपके फेफड़े में राख जमा है।

पवन कुमार सिंह आगे कहते हैं एनटीपीसी के कहलगांव सुपर थर्मल पॉवर प्लांट में बरसों से लगातार फ्लाई ऐश के निपटान में घोर लापरवाही बरती जा रही है। इस ओर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नजर नहीं है. लगातार जन शिकायत के बाद भी इस उड़नशील राख को साइलो के माध्यम से पूरी क्षमता पर संगृहीत नहीं करके चिमनियों के द्वारा धुंए के साथ वायुमंडल में उड़ा दिया जाता है। हवा के बहाव के साथ यह राख दस बीस किलोमीटर दूर तक मौत का सामान बनकर बरसती रहती है। इतना ही नहीं यह जहरीली हवा पास में बहती गंगा को भी प्रदूषित कर रही है। वहीं जिनके पास विकल्प है वे अब पलायन करने लगे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रदूषण नियंत्रण की नियामक संस्थाओं के नए मानक के अनुसार चिमनी के धुएं में प्रति घन मीटर 125 मिलीग्राम धूलकण की अनुमति है। यदि इस मानक का अनुपालन हो तो चिमनी से निकलने वाला धुंआ नंगी आंखों से दिखाई नहीं देना चाहिए, जबकि चिमनियों से निकलने वाले धुंआ के संग उड़ते फ्लाई ऐश को हर कोई नंगी आंखों से देख रहा है। महसूस कर रहा है। उस जहरीले घुटन से तड़प रहा है।

डॉक्टरों की चेतावनी:
स्थानीय चिकित्सकों का कहना है कि हालात सही नहीं है। बिना मास्क बाहर निकलना बेहद खतरनाक हो सकता है। यह हवा साइनस, अस्थमा, एलर्जी और फेफड़ों की बीमारियों को तेजी से बढ़ा रही है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ रहा है

जरा सोचिए हवा में तैरते फ्लाई ऐश अगर एक व्यक्ति के साइनस में राख जम सकती है, तो पूरे क्षेत्र के हजारों लोगों के फेफड़ों में क्या हो रहा होगा?
तस्वीरों में दिखाई दे रही ‘राख की गोलियां’ कोई कहानी नहीं, बल्कि इस जहरीले माहौल का सीधा सबूत हैं।
यह स्थिति अब सिर्फ प्रदूषण का मामला नहीं रही।यह एक उभरती हुई जनस्वास्थ्य आपदा है।जरूरत है कि प्रशासन, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और संबंधित एजेंसियां तुरंत कार्रवाई करें। अगर अब भी इस खतरे को हल्के में लिया गया, तो ‘ऐशमॉग’ चुपचाप कई जिंदगियों को निगल सकता है। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें। क्योंकि यह धुंध नहीं, ज़हर है।

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