शर्मामि गंगे/ एक्शन प्लान के अरबों गंगा में बहे, पर एक बूंद पानी साफ नहीं
1984 मे लाई गई गंगा एक्शन प्लान योजना की सारी राशि गंगा मे बह गई, लेकिन गंगा का एक बून्द पानी साफ नही हुआ। 2014 मे एनडीए सरकार आई और पूरे ताम झाम के साथ पुनः स्वच्छता के नाम पर नेशनल मिशन फार क्लीन गंगा (नमामी गंगे परियोजना) लाई, लेकिन काम करने का तरीका पुराना ही रह गया। बीते 10 वर्षो मे नदी के किनारे बसे नगरो के गंदे नालो का नदी मे बहाया जाना बंद नहीं हुआ। चूकि सर्वोच्च न्यायालय ने पर्यावरण से संबंधित मामले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) को हस्तांतरित कर दिया है, इसलिए एनजीटी अलग -अलग राज्यो की समय-समय पर सुनवाई करती है। बिहार राज्य से संबंधित सुनवाई के केंद्र मे “फ्लडप्लेन” क्षेत्र का सीमांकन, दीघा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की स्थिति, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए विमुक्त की गई राशि की स्थिति, नमामी गंगे योजना के कार्यान्वयन मे राज्य सरकार की भूमिका एव निगरानी, फीकल कालीफार्म ( प्रदूषण) की स्थिति जैसे प्रश्न शामिल थे। एनजीटी की अगली सुनवाई मे नमामी गंगे के अधिकारियो को यह बताना होगा कि दीघा में एसटीपी का निर्माण कैसे एवं क्यों हुआ ? गौरतलब है कि दीघा एसटीपी को न्यायालय गैरव्यवहारिक एव नियमो के विपरीत मानती है । कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा आखिर इस पर व्यय 835-करोड रूपए किससे वसूले जाएगे ? अब तक नमामी गंगे योजना के कार्यान्वयन मे 4300/-करोड रूपए से अधिक व्यय अगस्त -24 तक हो चुके है, लेकिन स्थिति मे कोई बदलाव नही आया। एक अन्य याचिका पर टिप्पणी करते हूए कोर्ट ने कहा कि बक्सर से भागलपुर के बीच का पानी ना नहाने योग्य है और ना ही पीने योग्य । न्यायालय के समक्ष एन एम सी जी ने स्वीकार किया है कि बिहार मे प्रतिदिन 1100 एमएलडी सीवेज गंगा मे जाता है, जबकि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता 343 एम एलडी की ही है यानि 750 एमएलडी सीवेज बगैर ट्रीटमेंट के ही प्रवाहित हो रहा है। राज्य के 8 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट मे 6 काम ही नही कर रहे । पटना नगर के गंदे नालों का पानी गंगा मे प्रवाहित करने के सिवा कोई दूसरा रास्ता ही बचा है। सच्चाई यह है कि सीवरेज नेटवर्क से लेकर घरो के लाईन को जोड़ने और मैनहोल बनाने का कार्य अधूरा है। पटना की सड़कों में जगह-जगह गड्ढे खोदे गए हैं, जिससे लोगो को बेहद परेशानी हो रही है। सूत्रो के मुताबिक पटना स्थित कंकडबाग के 17000 घर का कनेक्शन अधूरा है। 3527 मैनहोल अधूरे हैं। पटना के करीब 145 जगहो पर सडको को खोद कर छोड दिए गए है। जनजीवन अस्त- व्यस्त हो चुका है ।
पटना शहर का गंदा पानी सीधे गंगा मे बहाया जा रहा है। राज्य मे गंगा नदी का प्रवाह 445 किमी है। गंगा बिहार ही नही देश की की सबसे बडी नदी है। राज्य की जीवन रेखा है। प्रदूषण की वजह से मछलियो की अनेक प्रजातिया लुप्त प्राय हो गई । प्रदूषण का स्तर बढता जा रहा है। गंगा नदी के कुल प्रवाह क्षेत्र मे गंगा किनारे शहरो मे जल प्रदूषण की स्थिति गंभीर है। बनारस से आगे बिहार मे सुलतानगंज से कहलगांव तक डाल्फिन एव मछलियों का इलाका माना जाता है। मछुआरे कभी पूरे देश मे मछलियो का कारोबार किया करते थे। मछलियो की प्रजातियो के खत्म होने की वजह से आज इनके समक्ष आजीविका का संकट है। बेरोजगारी बढी है। इन इलाको मे पलायन भी बढा है। गंगा देश की सबसे लंबी नदी है। गंगा देश की सबसे बडी रिवर बेसिन है, जहां 40 प्रतिशत से अधिक लोग निवास करते है। करीब सौ शहर इस नदी के किनारे अवस्थित है । गंगा यमुना का मैदानी क्षेत्र दुनिया के सर्वाधिक ऊपजाऊ मैदानी क्षेत्र के रूप मे जाना जाता है। शताब्दियो से इस देश के लोगो के आध्यात्मिक एवम भौतिक पोषण करते आई है। बीते चालीस-पचास साल से सर्वाधिक बुरे दौर मे है। दुर्भाग्यजनक तौर पर कागजी योजनाओ के जरिए निर्मल गंगा के सभी दावे एव वादे खोखले साबित हुए।



