झारखंड नियोजन नीति में पांच क्षेत्रीय भाषा को मान्यता देने के लिए राजद महासचिव ने राज्यपाल को दिया ज्ञापन

रांची : झारखंड में हेमंत सोरेन की सरकार ने नियोजन नीति में भोजपुरी, मगही, मैथिली,अंगिका और भूमिज भाषा को मान्यता नहीं दिया है। इससे इन भाषा के लोगों के साथ समस्या उत्पन्न हो गई है। कई बार सड़कों पर उ कर प्रदर्शन भी किया है। यहां तक की सीएम हेमंत सोरेन को ज्ञापन भी दिया गया है।लेकिन अबतक इसपर कोई फैसला नहीं निकला है। आज हुई कैबिनेट की बैठक में भी इनलोगों को इस प्रस्ताव पर मुहर लगने की उम्मीद थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। वहीं प्रदेश राजद महासचिव सह अखिल भारतीय भोजपुरी मगही मैथिली अंगिका मंच के अध्यक्ष कैलाश यादव के नेतृत्व में 6 सदस्यों का प्रमुख प्रतिनिधिमंडल ने शुक्रवार को भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका भूमिज भाषा को नियोजन नीति में क्षेत्रीय भाषा के रूप में शामिल करने की मांग को लेकर राज्यपाल संतोष गंगवार से राजभवन में मुलाकात कर ज्ञापन दिया और विस्तारपूर्वक वार्ता कर अवगत कराया।
यादव ने राज्यपाल को कहा कि महामहिम मंच की ओर से आपका ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहना है कि, झारखंड राज्य पूर्ववर्ती बिहार राज्य से बना एक ऐसा राज्य है जहाँ सभी जाति धर्म एवं भाषा के लोग एक साथ मिलकर राज्य के उत्तरोत्तर विकास में निरंतर लगे हुए हैं।
झारखण्ड राज्य के विशिष्ट क्षेत्रों में कतिपय राजकीय प्रयोजनार्थ उर्दू, संथाली, बंगला, मुंडारी, हो, खरिया, कुडूख (उरांव ) कुरमाली, खोरठा, नागपुरी, पंचपरगनिया तथा उड़िया भाषा के अतिरिक्त भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगीका, एवं भूमिज भाषा को राज्य के द्वितीय राजभाषा कि मान्यता हेतु अधिसूचना 29अगस्त 2018 को निर्गत है।
झारखण्ड सरकार कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राज्यभाषा विभाग के अधिसूचना संख्या 1426 दिनांक 10. 03.2023 द्वारा निर्गत झारखण्ड कर्मचारी चयन आयोग परीक्षा संचालन नियमावली 2023 में उक्त 17 द्वितीय राज्यभाषाओं से 12 को क्षेत्रीय भाषा के रूप मान्यता दी गई है जबकि भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगीका एवं भूमिज को वंचित रखा गया है।
विदित हो कि पलामू एवं संथाल परगना प्रमंडल सहित राज्य के मुख्य शहर राँची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो गोड्डा, देवघर गिरिडीह, कोडरमा एवं चतरा में करोड़ों लोग इन भाषाओं को बोलते हैं, इन भाषाओं की साहित्य भी एक अमूल्य धरोहर है।
झारखण्ड सरकार कार्मिक, प्रशाशनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग के अधिसूचना संख्या 453दिनांक 18 फरवरी 2022 में जिलावार चिन्हित क्षेत्रीय भाषाओं में भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगीका एवं भूमिज के अतिरिक्त सभी भाषाओं को सम्मिलित किया गया है । वहीं राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि मैं इस विषय पर सरकार को पत्र लिखूंगा और इसे गंभीरता से अध्ययन करने का जिक्र करूंगा।

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