मधुकम जमीन विवाद में महादेव उरांव को सुप्रीम कोर्ट से भी झटका, याचिका वापस

रांची (गणादेश) : राजधानी रांची के रातू रोड स्थित मधुकम के करीब 45 डिसमिल भूखंड से जुड़ा विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद नए मोड़ पर आ गया है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देते हुए महादेव उरांव की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका पर शीर्ष अदालत में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान याचिका वापस लिए जाने की स्थिति बनी। इससे मधुकम जमीन विवाद की कानूनी लड़ाई एक बार फिर चर्चा में आ गई है। विवादित भूमि आरएस प्लॉट संख्या 319 तथा खाता संख्या 179 से संबंधित बताई जाती है। महादेव उरांव की ओर से भूमि पर अधिकार का दावा किया गया था। दूसरी ओर, भूमि पर रह रहे प्रभावित परिवारों की ओर से जमीन से जुड़े दस्तावेज, समझौते और भुगतान के तथ्य अदालत के समक्ष रखे गए। इन्हीं तथ्यों को लेकर हाईकोर्ट की कार्यवाही में गंभीर सवाल उठे थे।

हाईकोर्ट ने 12 परिवारों को 1-1 लाख रूपए देने का दिया निर्देश

मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने प्रभावित 12 परिवारों के पक्ष में महत्वपूर्ण निर्देश दिया था। अदालत ने प्रत्येक प्रभावित परिवार को 1-1 लाख रूपए मुआवजा दिए जाने का निर्देश दिया था। इस तरह 12 परिवारों के लिए कुल 12 लाख रूपए की मुआवजा राशि निर्धारित होती है। जमीन विवाद के बीच प्रभावित परिवारों के लिए यह निर्देश मामले का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। हाईकोर्ट की कार्यवाही में संबंधित पक्ष के आचरण और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों को लेकर भी गंभीर टिप्पणी हुई थी। अदालत ने न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने या गलत तथ्य प्रस्तुत करने के आरोपों को गंभीरता से लिया था।

समझौतों और भुगतान का मामला बना अहम

सुनवाई के दौरान प्रभावित परिवारों की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों में वर्ष 2019 और 2020 के दौरान हुए कई समझौतों तथा जमीन के बदले भुगतान का उल्लेख किए जाने की बात सामने आई। दावा किया गया कि करीब 38.25 डिसमिल जमीन से संबंधित लेनदेन में कुल 1.08 करोड़ रुपये से अधिक की राशि चेक के माध्यम से दी गई थी। प्रभावित पक्ष का आरोप था कि इन समझौतों और लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्यों का पूरा विवरण बाद की न्यायिक कार्यवाही में प्रस्तुत नहीं किया गया। इसी बिंदु को लेकर हाईकोर्ट में संबंधित पक्ष के आचरण पर सवाल उठे और न्यायालय ने मामले को गंभीरता से लिया।

12 परिवारों का मामला बना विवाद का केंद्र

मधुकम विवाद में करीब 12 प्रभावित परिवारों की स्थिति भी सुनवाई के दौरान प्रमुखता से सामने आई। परिवारों का कहना रहा कि जमीन संबंधी कार्रवाई के कारण उन्हें गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा। मकानों को हटाने की कार्रवाई के बाद विवाद केवल भूमि के अधिकार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रभावित परिवारों के अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया में प्रस्तुत तथ्यों का प्रश्न भी बन गया। हाईकोर्ट की कार्यवाही में गलत तथ्य प्रस्तुत करने और महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने से जुड़े आरोपों पर भी विचार हुआ। अदालत ने संबंधित पक्ष से जवाब मांगा और न्यायिक प्रक्रिया में पूर्ण एवं सही तथ्य प्रस्तुत करने के महत्व को रेखांकित किया। वही हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट पहुंची विशेष अनुमति याचिका के वापस लिए जाने से मामले में नया कानूनी मोड़ आया है।

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