कहलगांव की नन्ही पर्वतारोही ने रचा इतिहास, मात्र 11 वर्ष की आयु में नंदा देवी बेस कैंप (15,500 फीट) फतह कर की अद्भुत उपलब्धि

भागलपुर। साहस की पराकाष्ठा और दृढ़ निश्चय की मिसाल बनकर कहलगांव की बेटी अनन्या राजश्री ने ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जो बड़े-बड़ों के लिए भी प्रेरणा बन गया है। भागलपुर जिले के कहलगांव प्रखंड के कौवापुल, यदुवंशी नगर की रहने वाली यह नन्ही सी बालिका जब 15,500 फीट की ऊंचाई पर नंदा देवी बेस कैंप पर अपने पिता के संग तिरंगा लहराती खड़ी हुई, तो मानो पूरे क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा हो गया।

सिर्फ 11 वर्ष की उम्र में यह मुकाम हासिल करना किसी चमत्कार से कम नहीं। अनन्या, जो वर्तमान में डीपीएस सुषांत लोक, गुरुग्राम में कक्षा 6 की छात्रा हैं, ने अपने पिता अंगद कुमार के साथ मिलकर इस कठिन अभियान को सफलतापूर्वक पूरा किया।

बर्फ, बारिश और ठंड से जूझती रही नन्ही ट्रेकर

इस अभियान में अनन्या को हर कदम पर प्रकृति की कठिन परीक्षाओं से गुजरना पड़ा। कभी घने जंगलों में तंबू में रात बितानी पड़ी, तो कभी तेज़ हवाओं और बर्फबारी के बीच संकल्प को मजबूत रखना पड़ा। कई बार नदी पार करनी पड़ी और पथरीले रास्तों पर घंटों चलना पड़ा, मगर इस बालिका का हौसला कभी नहीं डगमगाया। उनके पिता अंगद कुमार ने बताया – ‘अनन्या ने कभी हार नहीं मानी। जब दूसरे बड़े ट्रेकर्स थककर रुक जाते थे, वह मुस्कराते हुए आगे बढ़ने का हौसला दिखाती थी।’

पहले भी दिखा चुकी है साहस का परिचय

यह पहली बार नहीं है जब अनन्या ने ऐसी ऊंचाईयों को छूने का प्रयास किया हो। वर्ष 2024 में वह अपने पिता के साथ तुंगनाथ – चंद्रशिला ट्रेक सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी हैं। वह गुरुग्राम वॉकर टीम की सक्रिय सदस्य हैं और नियमित रूप से अरावली पर्वतमाला में हाइकिंग करती हैं।

बड़ी सोच, बड़े सपने

अनन्या का सपना है कि वह आने वाले वर्षों में माउंट एवरेस्ट जैसी विश्व की ऊँची चोटियों को भी फतह करे। वह कहती हैं – ‘मैं चाहती हूँ कि जब मैं तिरंगा सबसे ऊँचे पर्वत पर लगाऊं, तो मेरा शहर कहलगांव और मेरा देश मुझ पर गर्व करे।’ उनकी यह बात ही दर्शाती है कि उम्र चाहे कितनी भी कम हो, अगर मन में लक्ष्य बड़ा हो तो कोई भी पर्वत ऊंचा नहीं होता।

बच्चों और बड़ों के लिए प्रेरणा

अनन्या राजश्री की यह उपलब्धि न सिर्फ कहलगांव या भागलपुर की शान है, बल्कि पूरे बिहार और देश के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका अनुशासन, आत्मविश्वास और रोमांच के प्रति प्रेम हर उस व्यक्ति को यह संदेश देता है – ‘अगर हौसला बुलंद हो, तो रास्ते खुद बन जाते हैं।’

समाज की ओर से शुभकामनाएं

स्थानीय लोगों, शिक्षकों और शुभचिंतकों ने अनन्या को बधाई दी है। सभी को उम्मीद है कि यह नन्ही पर्वतारोही भविष्य में और भी ऊंचाइयां छुएगी और देश का नाम रोशन करेगी। ‘कहलगांव की इस बिटिया ने साबित कर दिया कि साहस उम्र नहीं देखता।’

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