पारस एचईसी हॉस्पिटल, रांची में अत्याधुनिक ‘स्पाइग्लास’ एंडोस्कोपी तकनीक की शुरुआत,जटिल पित्त रोगों का अब रांची में ही संभव होगा सफल इलाज

रांची:  स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतर कार्य को आगे बढ़ाते पारस एचईसी हॉस्पिटल, रांची ने गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। पारस एचईसी हॉस्पिटल रांची ने अत्याधुनिक एंडोस्कोपी तकनीक ‘स्पाइग्लास’ की शुरुआत की है, जिससे पित्त की नली के जटिल पत्थरों और कैंसर का सटीक उपचार अब रांची में ही संभव हो सकेगा। मरीजों को जटिल सर्जरी से राहत मिलेगी। इस तकनीक का पहला सफल प्रयोग 23 दिसंबर 2025 को एक ऐसे मरीज पर किया गया, जिसके पित्त की नली में इतने बड़े पत्थर थे कि सामान्य ईआरसीपी प्रक्रिया से उन्हें निकालना असंभव था। गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. ब्रिगेडियर आलोक चंद्रा ने कहा कि पूर्व में ऐसे मरीजों को या तो बड़े ऑपरेशन  से गुजरना पड़ता था या इलाज के लिए राज्य से बाहर जाना पड़ता था लेकिन अब पारस एचईसी हॉस्पिटल, रांची में इसकी सुविधा मरीजों को मिलेगी।डॉ. ब्रिगेडियर आलोक चंद्रा ने कहा कि स्पाइग्लास एंडोस्कोपी के तहत पित्त की नली के अंदर एक अत्यंत सूक्ष्म एंडोस्कोप डाला जाता है। इसमें इलेक्ट्रोहाइड्रोलिक लिथोट्रिप्सी (शॉक वेव जनरेटर) का उपयोग कर पत्थरों को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है, जिससे नली की पूरी सफाई हो जाती है। संबंधित मरीज को इस प्रक्रिया के मात्र दो दिन बाद ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यह तकनीक पित्त की नली के कैंसर के इलाज में भी मील का पत्थर साबित होगी। इसके माध्यम से डॉक्टर कैंसर प्रभावित हिस्से को प्रत्यक्ष रूप से देखकर वहां से सटीक बायोप्सी ले सकते हैं। साथ ही, यदि ट्यूमर के कारण नली में रुकावट हो, तो लेजर तकनीक से रास्ता बनाकर स्टेंटिंग की जा सकती है।

पारस हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ नीतेश कुमार ने कहा कि पारस हॉस्पिटल रांची का लक्ष्य गैस्ट्रोएंटरोलॉजी और एंडोस्कोपी की सेवाओं में निरंतर सुधार करना है ताकि झारखंड के मरीजों को विश्व स्तरीय सुविधाएं स्थानीय स्तर पर प्राप्त हो सकें। अब मरीज को किसी दूसरे शहर में जाने की जरूरत नहीं है।

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